
क्या रूस-यूक्रेन युद्ध पूरी दुनिया में तबाही मचाकर ही थमेगा, जानिए कैसे रुकती है दो देशों की लड़ाई?
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रूस-यूक्रेन लड़ाई के बीच तीसरे विश्व युद्ध की आशंका जताई जा रही है. ये डर इसलिए भी जोर पकड़ रहा है क्योंकि रूस से दुश्मनी रखने वाले कई देश चुपके से लड़ाई का हिस्सा बन रहे हैं. तो क्या ये प्रॉक्सी वॉर वाकई सबको अपनी चपेट में ले लेगा? या फिर कोई इंटरनेशनल एजेंसी सुलह-समझौता करा पाएगी? समझिए, अब तक कैसे दो देशों के बीच जंग थमती आई है.
दो मुल्कों के बीच जंग आमतौर पर शांति वार्ताओं से नहीं थमती, बल्कि इसका अंत तभी होता है, जब एक की हार हो. इसका सबसे बड़ा उदाहरण पहला वर्ल्ड वॉर है. साल 1918 में लड़ाई खत्म तो हुई, लेकिन असल में दुनिया कन्फ्लिक्ट ट्रैप में फंस गई थी. ये वो स्थिति है, जो युद्ध के तुरंत बाद आती है और दशकों तक चलती है. देश गरीबी झेल रहे होते हैं. आंतरिक तनाव रहता है. कई गुट बन चुके होते हैं. ये सबकुछ मिलाकर एक नए युद्ध की जमीन तैयार हो रही होती है.
पहला वर्ल्ड वॉर पूरी तरह रुका नहीं था
पहला विश्व युद्ध क्लीयर-कट जीत या हार नहीं था. इस दौरान जर्मनी को लगा कि वो सबसे मजबूत देश होकर उभर सकता है, अगर बाकी देशों को पटखनी दे दे तो. इसके लिए नाजी शासक हिटलर ने खुद को तैयार किया और एक के बाद एक देशों को अपने साथ मिलाने लगा. पोलैंड पर हमले से ही दूसरा वर्ल्ड वॉर शुरू हो गया.
ऐसे हुई लड़ाई खत्म
जर्मनी और जापान तेजी से सबको नुकसान पहुंचा रहे थे. आखिरकार बहुत से देश एक पाले में आए और उनपर बमबारी शुरू कर दी. हार तय दिखने के बाद हिटलर ने खुदकुशी कर ली, जबकि जापान ने सरेंडर कर दिया. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने अनकंडीशनल सरेंडर पर जोर दिया था. यानी अगर जापान और जर्मनी हथियार नहीं डालते तो उन्हें तबाह कर दिया जाता. इस तरह से एक पार्टी जीती, और दूसरी हारी, जिसके बाद ही दो विश्व युद्ध एक साथ खत्म हुए.
क्या कहता है शोध

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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