
क्या पाकिस्तान के पास अमेरिका को लुभाने के लिए पर्याप्त तेल भंडार है?
AajTak
पाकिस्तान का घरेलू तेल उत्पादन लगातार घट रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में पाकिस्तान ने हर रोज 89030 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन किया. यह 2025 में घटकर 64262 बैरल प्रतिदिन रह जाने का अनुमान है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा पाकिस्तान के 'बड़े तेल भंडार' को विकसित करने के चौंकाने वाले ऐलान ने कई लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इस इस्लामी राष्ट्र के पास वास्तव में इतना बड़ा तेल भंडार है कि वह अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित कर सके? पाकिस्तानी सरकार के आंकड़ों और आधिकारिक दस्तावेजों का विश्लेषण एक अलग ही तस्वीर पेश करता है.
तमाम कोशिशों के बावजूद, पाकिस्तान का घरेलू तेल उत्पादन घट रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में पाकिस्तान ने हर रोज 89030 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन किया, जिसके 2025 में घटकर 64262 बैरल प्रतिदिन रह जाने का अनुमान है.
क्या है ट्रंप के कदम का आधार?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बड़े तेल भंडार' विकसित करने का ऐलान दो दावों पर आधारित नजर आता है. पहला दावा पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय और अब बंद हो चुकी यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) के बीच 2020 में की ज्वाइंट स्टडी पर आधारित है.
स्टडी में क्या मिला?

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?







