
क्या कन्हैया कुमार ने हाईजैक किया तेजस्वी यादव का एजेंडा? बिहार में कांग्रेस की पदयात्रा का कैसा होगा असर
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दिलचस्प बात यह है कि पिछले पांच साल में अलग-अलग राजनीतिक दलों की ओर बेरोजगारी के मुद्दे को जिंदा रखने की जोरदार कोशिश की गई है. बिहार सरकार के हालिया बजट में युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया और सरकार ने बिहार के युवाओं को 12 लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया है.
बिहार में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस राज्य में बड़े पैमाने पर पलायन और बेरोजगारी के मुद्दे को उठाकर युवा वोट बैंक तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है. कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार की 'पलायन रोको, नौकरी दो' पदयात्रा भी इसी कोशिश का हिस्सा है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की ओर से उठाया जा रहा मुद्दा आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के बेरोजगारी, पलायन और शिक्षा के चुनावी एजेंडे से मेल खाता है, जिसे वह 2020 के विधानसभा चुनावों के बाद से जोर-शोर से उठा रहे हैं.
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कन्हैया कुमार की पदयात्रा तेजस्वी यादव के लिए परेशानी का सबब बनेगी, क्योंकि दोनों नेता जो भले ही एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, लेकिन महागठबंधन का हिस्सा हैं, समाज के युवा वर्ग तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
तेजस्वी यादव की चिंता और भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी सोमवार को बेगूसराय में कन्हैया कुमार की पदयात्रा में शामिल हुए, जिससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस इस बार चुनावी वापसी के लिए युवा वोटबैंक को टारगेट कर रही है. क्या राहुल-कन्हैया की जोड़ी तेजस्वी यादव से बिहार में सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे को छीनना चाहती है, यह सवाल बहस का विषय बना हुआ है.
तेजस्वी ने किया था 10 लाख नौकरियों का वादा
बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था और सरकार बनने पर 10 लाख सरकारी नौकरी देने का वादा किया था. जिसके बाद बीजेपी ने भी बिहार में 20 लाख सरकारी नौकरी और स्वरोजगार के अवसर मुहैया कराने का वादा कर इसका जवाब दिया था.
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