
कोरोना की सबसे खौफनाक कहानियां: एक परिवार के 8, दूसरे के 6 लोग महीने भर में मरे
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ये मामला दक्षिण दिल्ली का देवली इलाका का है. जहां मित्तल निवास में 15 लोगों का परिवार रहता था. बुजुर्ग दादा-दादी से लेकर उनके बच्चे और पोते सभी इस परिवार में एक साथ हंसी खुशी रहते थे. लेकिन इनकी सारी खुशियों को कोरोना महामारी ने रौंद कर रख दिया.
दक्षिण दिल्ली से एक दिलदहला देने वाला मामला आया है. जहां 28 दिनों के अंदर एक ही परिवार के 6 लोग काल के गाल में समा गए. 31 मई को इस परिवार में सभी 6 लोगों का एक साथ 13 वीं कार्यक्रम किया गया है. वहीं, लखनऊ में 21 दिनों के अंदर एक ही परिवार के 8 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर मौत हो गई. (प्रतीकात्मक फोटो) दरअसल, ये मामला दक्षिण दिल्ली के देवली इलाके का है. जहां मित्तल निवास में 15 लोगों का परिवार रहता था. बुजुर्ग दादा-दादी से लेकर उनके बच्चे और पोते सभी इस परिवार में एक साथ हंसी खुशी रहते थे. लेकिन इनकी सारी खुशियों को कोरोना महामारी ने रौंद कर रख दिया. कोरोना के काल नें इस परिवार पर इतना वार किया कि इनके आंखों के आंसू सूख गए. (प्रतीकात्मक फोटो)
मर तो वो 13 साल पहले गया था लेकिन मौत सचमुच तब उसके हिससे में आई जब इस चिता में लेटने के बाद जब हरीश की आत्मा की लाइट यानी रोशनी चिता से उठती इस आग के साथ मिलकर हमेशा-हमेशा के लिए ये दुनिया छोड़ गई. पर इस दुनिया को छोड़ने से पहले हरीश आजादा भारत के इतिहास का पहला भारतीय बन गया जिसे अदालत और अस्पताल ने मिलकर मां-बाप की इच्छा को ध्यान में रखते हुए इच्छामृत्यु दी.

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