
कोरोना: इन हालात में रहता है हार्ट अटैक का खतरा, ऐसे बचें
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कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को नए-नए लक्षण देखने को मिल रहे हैं. इस बीमारी से ठीक होने के बाद भी किसी ना किसी दूसरी बीमारी का खतरा बरकरार ही रहता है. खासतौर से दिल के मरीजों के लिए कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई तरह ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कोरोना के मरीजों में लंबे समय तक हार्ट अटैक, क्लॉटिंग और हार्ट फेलियर का खतरा बरकरार रहता है. ऐसे में डॉक्टर से जानते हैं कि कोरोना से ठीक होने के बाद दिल का ख्याल किस तरह रखा जा सकता है.
कोरोना की दूसरी लहर में लोगों को नए-नए लक्षण देखने को मिल रहे हैं. इस बीमारी से ठीक होने के बाद भी किसी ना किसी दूसरी बीमारी का खतरा बरकरार ही रहता है. खासतौर से दिल के मरीजों को कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई तरह ही चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कोरोना के मरीजों में लंबे समय तक हार्ट अटैक, क्लॉटिंग और हार्ट फेलियर का खतरा बरकरार रहता है. ऐसे में डॉक्टर से जानते हैं कि कोरोना से ठीक होने के बाद दिल का ख्याल किस तरह रखा जा सकता है. सहारा हॉस्पिटल लखनऊ के सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर गौतम स्वरूप ने 'आज तक' को बताया कि दिल के मामले में कोरोना के मरीजों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए. दिल से जुड़े किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. कोरोना से ठीक होने के बाद भी दिल की जांच कराना जरूरी है. क्या ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी वालों को वैक्सीन से कोई खतरा है- डॉक्टर गौतम का कहना है कि दिल की बीमारी वाले मरीजों को वैक्सीन से घबराने की कोई जरूरत नहीं है बल्कि इन लोगों को जल्दी से जल्दी वैक्सीन लगवा लेनी चाहिए. इन लोगों को वैक्सीन का सबसे ज्यादा फायदा होगा.
NCERT ने 3 से 8 साल तक के बच्चों के लिए ई-मैजिक बॉक्स ऐप लॉन्च किया है. इस प्लेटफॉर्म पर बच्चे मोबाइल या कंप्यूटर से पढ़ सकते हैं और नई-नई चीजें सीख सकते हैं. इसमें एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्मार्ट बॉट है, जो बच्चों की पढ़ाई में मदद करता है और उनके सवालों का आसान जवाब देता है. इसके साथ ही इसमें खेल-खेल में सीखने वाली गतिविधियां भी शामिल हैं.












