
कोटा: कोचिंग छात्राओं के बीच पहुंचे जिला कलेक्टर, डिनर के बाद गाया ये गाना
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शिक्षा नगरी में अब हर शुक्रवार कोचिंग के बच्चों के साथ जिला कलेक्टर डिनर करेंगे. "कामयाब कोटा" अभियान के अंतर्गत कोचिंग सेक्टर के सुदृढीकरण के उद्देश्य से जिला कलेक्टर ने यह शुरुआत कुन्हाड़ी लैंडमार्क सिटी स्थित गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं के साथ डिनर कर के की.
आ चल के तुझे मैं ले के चलूं एक ऐसे गगन के तले.. जहां गम भी ना हों, आंसू भी ना हों, बस प्यार ही प्यार पले...ये वो गीत है जो कोटा के जिला कलेक्टर ने स्टूडेंट्स के साथ भावनात्मक रिश्ता जोड़ने के लिए गुनगुना रहे थे. बता दें कि ये जिला प्रशासन की नई पहल है जिसमें कोटा के माहौल को बदलने का प्रयास किया जा जा रहा है.
कोटा में कोचिंग विद्यार्थियों के मानसिक सम्बल एवं उन्हें सकारात्मक माहौल देने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक और बड़ी पहल की है. जिला कलेक्टर डॉ रविंद्र गोस्वामी अब हर शुक्रवार किसी भी हॉस्टल में विद्यार्थियों के साथ डिनर कर उनके साथ संवाद करेंगे. "कामयाब कोटा" अभियान के अंतर्गत कोचिंग सेक्टर के सुदृढीकरण के उद्देश्य से जिला कलेक्टर ने यह शुरुआत शुक्रवार रात्रि कुन्हाड़ी लैंडमार्क सिटी स्थित गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं के साथ डिनर करके की.
यहां रह रही बच्चियों के साथ डाइनिंग टेबल पर अनौपचारिक वातावरण में उनके साथ बातचीत की तो कुछ ही देर में बच्चियां ऐसे घुल -मिल गई जैसे अपने परिवार के सदस्य के साथ हों. कलेक्टर ने सहजता से उनकी बातें सुनी और अपनी बातें कहीं. उन्होंने छात्राओं के साथ विद्यार्थी जीवन के अपने अनुभव बांटे. उन्होंने भी हंसी ठहाकों के बीच गहरी सीख और गुरु मंत्र भी दे डाले.
कलेक्टर ने गाया गाना अपने बीच जिला कलेक्टर को पाकर छात्राएं काफी खुश नजर आ रही थीं. छात्राओं ने उन्हें दैनिक अध्ययन में आने वाली परेशानियों, असमंजस, अध्ययन के तौर तरीके पर बात की. वहीं, कलेक्टर ने उन्हें अध्ययन में एकाग्रता, टाइम मैनेजमेंट और सफलता के टिप्स दिए. यही नहीं जिला कलेक्टर ने "आ,चल के तुझे, मैं ले के चलूं एक ऐसे गगन के तले.. जहां गम भी ना हो आंसू भी ना हो बस प्यार ही प्यार पले.." गीत गाकर माहौल में अपनत्व घोल दिया.
जिला कलेक्टर ने इन छात्राओं के साथ तिरंगा केक भी काटा और उन्हें उपहार स्वरूप पेन भेट किए, छात्राओं ने बताया कि इस तरह अचानक हमारे बीच जिला कलेक्टर का आना एक सुखद आश्चर्य था.
अपने अनुभवों से दी सीख- जिला कलेक्टर ने छात्राओं के साथ लगभग 2 घंटे का समय बिताया. छात्राओं से संवाद में उन्होंने बताया कि वह भी कोटा में एक विद्यार्थी के रूप में कोचिंग के लिए आए थे. फिर यहां मन नहीं लगने पर जल्दी ही यहां से चले गए और फिर स्वयं के बूते ही पढ़ाई कर सफलता पाई. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में इस तरह के दौर आते हैं जब असमंजस, अनिर्णय की स्थिति होती हैं और स्ट्रेस घेर लेता है. ऐसे में मजबूत होकर समझदारी से काम लेने की जरूरत होती है. किसी भी समस्या से घबराएं नहीं, समस्याएं हमें मजबूत बनाने के लिए आती हैं. घबरा के भागने के बजाय इनका सामना करें, आगे बढ़ें.

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