
'कॉलेज में छेड़छाड़ और मारपीट करता था मनोजीत...', कोलकाता गैंगरेप के मुख्य आरोपी के पूर्व बैचमेट का खुलासा
AajTak
दोस्त ने दावा किया अपनी हरकतों की वजह से ही छात्रसंघ ने मनोजीत के कार्यक्रमों में शामिल होने पर बैन लगा दिया था, बावजूद इसके उसने कैंपस में अपनी गुंडागर्दी जारी रखी और लगातार विवादित घटनाओं में शामिल होता रहा.
पश्चिम बंगाल के साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज कैंपस में फर्स्ट ईयर की छात्रा के साथ गैंगरेप मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा के पूर्व बैटमेट तितास मन्ना ने बताया कि वह पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है और एक वारदात के बाद मनोजीत कुछ समय के लिए अंडरग्राउंड भी हो गया था. अब तक इस मामले में पूर्व छात्र मनोजीत समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, इनमें कॉलेज के दो छात्र और एक गार्ड शामिल है.
छात्रसंघ ने लगाया था बैन
मुख्य आरोपी मनोजीत के दोस्त और पूर्व बैचमेट तितास ने दावा करते हुए कहा कि वह 2012 से मनोजीत को जानता है और कुछ साल पहले तक दोनों करीबी दोस्त थे. एक ही कॉलेज से जुड़े थे और टीएमसीपी (तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद) में एक साथ एक्टिव थे. उन्होंने बताया कि मनोजीत 2013 में एक घटना के बाद कुछ समय के लिए अंडरग्राउंड भी हो गया था, लेकिन 2016 के आसपास कॉलेज में वापस आ गया.
ये भी पढ़ें: 'मेरा बेटा कॉलेज की अंदरूनी राजनीति का शिकार हुआ', बोले कोलकाता गैंगरेप के मुख्य आरोपी के पिता
दोस्त ने दावा किया अपनी हरकतों की वजह से ही छात्रसंघ ने कार्यक्रमों में उसकी हिस्सेदारी पर बैन लगा दिया था, बावजूद इसके मनोजीत ने कथित तौर पर कैंपस में अपनी हरकतें जारी रखीं और लगातार विवादित घटनाओं में शामिल होता रहा. दोस्त ने आरोप लगाया कि मनोजीत महिला छात्रों से छेड़छाड़, मारपीट, वसूली जैसी कई घटनाओं में शामिल रहा है. लेकिन उसके स्थानीय प्रभाव और समर्थन जुटाने की क्षमता के कारण, पीड़ित औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से डरते थे.
पहले भी दर्ज हुई है FIR

सरकार ने राज्यसभा में बताया कि निजाम के 173 बहुमूल्य गहने 1995 से भारतीय रिजर्व बैंक के वॉल्ट में कड़ी सुरक्षा में रखे गए हैं. संस्कृति मंत्रालय ने इनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और विरासत महत्व को स्वीकार किया है. केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इन गहनों को हैदराबाद में स्थायी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए स्थानांतरित करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

Delhi Weather: दिल्ली में फरवरी की शुरुआत मौसम में बदलाव के साथ होगी. जिसमें हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिलेगा. IMD के अनुसार, 31 जनवरी से 3 फरवरी तक न्यूनतम तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 19-21 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा. जनवरी में असामान्य बारिश के बाद फरवरी की शुरुआत भी ठंडी और गीली रहने की संभावना है.

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?






