
कैसे हिंसक झड़प में बदल गया लद्दाख का शांतिपूर्ण प्रदर्शन? हिल डेवलपमेंट काउंसिल के CEO ने बताई हकीकत
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LAHDC के सीईओ ताशी ग्याल्सन ने कहा कि लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भूख हड़ताल शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ उकसाने वालों के कारण माहौल बिगड़ गया. उन्होंने हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए उपराज्यपाल से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की है. पुलिस कार्रवाई में चार युवाओं की मौत और कई घायल हुए.
लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों को लेकर लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) के सीईओ ताशी ग्याल्सन ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि लोग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए आए थे. भीड़ को अचानक भड़काया गया और देखते ही देखते हिंसा शुरू हो गई.
कैसे बिगड़ गया माहौल?
ग्याल्सन ने बताया कि भूख हड़ताल शुरू में पूरी तरह शांतिपूर्ण थी और इसका मकसद बड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाना था. सरकार समय-समय पर बातचीत कर रही थी और यह आश्वासन भी दिया गया था कि लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी. इसके बावजूद अफवाहें फैलने लगीं कि सरकार गंभीर नहीं है और कोई कदम नहीं उठाएगी. कुछ उकसाने वाले लोगों ने बयानबाजी कर माहौल बिगाड़ा.
उन्होंने कहा, '24 सितंबर को जो घटना हुई, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं.' ग्याल्सन ने कहा कि उपराज्यपाल से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और पूरी पारदर्शिता व जवाबदेही तय की जाए.
'हिंसा और पुलिस कार्रवाई दोनों की जवाबदेही तय हो'
उन्होंने कहा कि हिंसा के दौरान पुलिस की ओर से कड़ी कार्रवाई की गई, जिसकी वजह से चार युवाओं की जान चली गई और कई लोग घायल हुए. ग्याल्सन ने कहा कि हिंसा के लिए भी और इसे नियंत्रित करने में हुई ज्यादा बल प्रयोग की घटना, दोनों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए.

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