
कैसे यूक्रेन का शरणार्थी संकट यूरोपीय देशों को मौलिक रूप से बदल रहा है?
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रूस और यूक्रेन में जारी जंग के बीच लोगों का पलायन जारी है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, अब तक 38 लाख से ज्यादा लोग यूक्रेन छोड़ चुके हैं. इनमें से ज्यादातर लोग पोलैंड में शरण ले रहे हैं.
मात्र एक महीने की अवधि में किसी देश की जनसंख्या में लगभग छह प्रतिशत की वृद्धि देखना असामान्य है. साथ ही युद्ध में रूस के हमले से तबाह हुए यूक्रेन के लगभग नौ प्रतिशत लोग - जिनमे मुख्य रूप से महिलाएं और बच्चे हैं, को भी अपने देश की सीमाओं से भागते हुए देखना भी बहुत ही असामान्य है.
यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के कारण पिछले सात दशकों में यूरोप में शायद ही कभी ऐसी तबाही हुई हो. युद्ध के एक महीने के अंदर ही यूक्रेन से लगभग 3.8 मिलियन लोगों का पलायन हुआ है. वहां की कुल जनसंख्या 43 मिलियन है.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस शरणार्थी संकट का पैमाना और गति अब तक का सबसे बड़ी है. यह अभूतपूर्व विस्थापन मानव तबाही में बदल सकता है क्योंकि यूक्रेन की लगभग एक चौथाई आबादी (दस मिलियन से अधिक लोग) रूस के हमले से खुद को बचाने के लिए अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं - कुछ देश के भीतर और कई अन्य देशों में जा रहे हैं . यदि आक्रमण जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है.
रूसी सैन्य बलों ने 24 फरवरी, 2022 को अपना आक्रमण शुरू किया, और वे अभी तक यूक्रेन में इमारतों और नागरिकों पर बमबारी और गोला-बारूद जारी रखे हुए है .
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अधिकांश शरणार्थी पूर्वी यूरोप के पड़ोसी देशों में भाग गए, पोलैंड ने उनमें से अधिकांश को स्थान प्रदान किया, उसके बाद रोमानिया, मोल्दोवा, हंगरी और स्लोवाकिया का स्थान रहा. यूएनएचसीआर के अनुमानों के अनुसार, लगभग 23 लाख लोगों ने पोलैंड में प्रवेश किया, जिसके कारण उसकी जनसंख्या में केवल एक महीने में लगभग छह प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

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