
कैसा दिखता है वो फांसी घर, जहां आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को दी जाएगी फांसी
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मथुरा जेल का ये फांसी घर 1870 में अंग्रेजों ने बनवाया था. यानी आज से करीब 150 साल पहले इसे बनाया गया था. लेकिन 1947 से लेकर अब तक यहां किसी भी महिला को फांसी नहीं दी गई है और अब शबनम की दया याचिका खारिज होने के बाद मथुरा जेल के इस फांसी घर में अचानक से सरगर्मी तेज हो गई है.
आजाद हिंदुस्तान में पहली बार किसी महिला को फांसी देने की तैयारी की जा रही है. ये फांसी उत्तर प्रदेश के मथुरा जेल में दी जानी है. दरअसल, मथुरा जेल प्रदेश की एकमात्र जेल है जहां पर महिला फांसी घर है. खास बात ये है कि इस जेल में सिर्फ एक ही फांसी घर है और वो महिलाओं के लिए है. पुरुषों के लिए इस जेल में फांसी घर नहीं बनाया गया है. आजतक को मथुरा के इस फांसी घर की दो तस्वीरें प्राप्त हुई हैं, जिसे देखकर फांसी घर की हालत देखी जा सकती है. चूंकि आजाद भारत में कभी किसी महिला को फांसी ही नहीं दी गई इसलिए ये फांसी घर भी शायद ही कभी खुला हो. लेकिन जैसे ही राष्ट्रपति ने शबनम की दया याचिका खारिज की, उसके बाद जेल प्रशासन ने सबसे पहले उस कंपाउंड का निरीक्षण किया जहां पर फांसी घर बना है.
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