
केवल गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई ही नहीं... ये गैंगस्टर भी करते हैं वसूली, रंगदारी और माफियागिरी
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भारत में कई ऐसे शातिर गैंगस्टर सक्रीय हैं, जिनका धंधा केवल खौफ और अपराध की बुनियाद पर चलता है. ये गैंगस्टर भी अवैध वसूली करते हैं, रंगदारी वसूलते हैं और अपना माफिया राज चलाते हैं. इनकी करतूतों पर तमाम राज्यों की पुलिस शिकंजा कसने में नाकाम नजर आती हैं.
Gangsters: जुर्म की दुनिया में केवल गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई ही कुख्यात नहीं हैं, बल्कि भारत में कई ऐसे शातिर गैंगस्टर सक्रीय हैं, जिनका धंधा भी खौफ और अपराध की बुनियाद पर चलता है. ये गैंगस्टर भी अवैध वसूली करते हैं, रंगदारी वसूलते हैं और अपना माफिया राज चलाते हैं, इन शातिर अपराधियों की करतूतों पर तमाम राज्यों की पुलिस शिकंजा लगाने में नाकाम नजर आती हैं. हाल ही में हमने आपको लॉरेन्स और गोल्डी की करतूतों से वाकिफ कराया था. अब आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ और अपराधियों की क्राइम कुंडली.
पुलिस और NIA देश में सक्रीय कुख्यात गैंग और सिंडिकेट का सफाया करना चाहती है. ऐसे में हम आपको आपको कुछ ऐसे गैंग और गैंगस्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी वजह से आमजन और कारोबारी त्रस्त रहते हैं.
गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई
इस गैंगस्टर के गुर्गे पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, और राजस्थान में सक्रिय हैं. इसका गैंग कनाडा और दुबई से भी ऑपरेट करता है. सिद्धू मेसूवाला की हत्या में जब से गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम आया है, तब से हर कोई उसके बारे में सबकुछ जानना चाहता है. आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे क़ि लॉरेंस की इस क्राइम कंपनी में सब कुछ डिजिटल है. ये एक वर्चुअल संसार जैसा नज़र आता है. इस गैंग से जुड़े करीब 1000 लोग, जिसमें शार्प शूटर्स, बदमाश, करीयर, सप्लायर, रेकी पर्सन, लॉजिस्टिक स्पॉट बॉय, शेल्टर मेन सोशल मीडिया विग के सदस्य शामिल हैं. इस गैंग के टारगेट वर्चुअल नंबरों से ऑडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए तय किए जाते हैं.
लॉरेंस इस क्राइम कंपनी में मास्टर ब्रेन है तो गोल्डी बराड़ कंपनी की रीढ़ की हड्डी है. लारेंस का भांजा सचिन बिश्नोई कंपनी का भर्ती सेल और टारगेट प्लान का प्रमुख है, जो इस वक्त फरार है. जबकि ऑस्ट्रिया से अनमोल और कनाडा से विक्रम बराड़ कंपनी की फाइनेंस डील को संभालते हैं. इस क्राइम कंपनी में हर टारगेट से जुड़ा शख्स केवल अपने आगे वाले एक शख्स को जानता है. इसके अलावा एक ऑपरेशन में जितने भी बंदे गैंग से जुड़े होते हैं, उन्हें बाकी गैंग मेम्बर के बारे में कोई भी जानकारी नहीं रहती.
बकायदा एक फुलप्रूफ़ प्लानिंग के मुताबिक गैंग के सदस्यों को अलग-अलग काम सौंपे जाते हैं. यानी रेकी कौन करेगा, पनाह कौन देगा? गाड़ियां कौन सप्लाई करेगा? हथियार कौन मुहैया कराएगा? क़त्ल के बाद किस तरफ किधर भागना है, और सबसे बड़ा सवाल कि फंडिंग कैसे होगी, इसे भी क्राइम मास्टर ही तय करते हैं. किलिंग के वक्त मौजूद गैंग मेम्बर भी अक्सर एक दूसरे को नहीं जानते ताकि पकड़े जाने पर गैंग के बाक़ी सदस्यों पर आंच ना आ सके.

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