
केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के पहले CM का पद आज संभालेंगे उमर अब्दुल्ला, कैबिनेट के लिए सामने आए ये 10 संभावित नाम
AajTak
उमर अब्दुल्ला आज दूसरी बार जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. केंद्र शासित जम्मू कश्मीर के पहले सीएम का रिकॉर्ड भी उमर के नाम दर्ज हो जाएगा. उमर अब्दुल्ला कैबिनेट में किन 10 नेताओं को जगह मिलेगी? संभावित नाम सामने आए हैं.
केंद्र शासित जम्मू कश्मीर को पहली सरकार मिलने जा रही है. नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के विधायक दल के नेता उमर अब्दुल्ला आज केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण समारोह डल झील के किनारे शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सेंटर में होना है लेकिन उमर की टीम में किन चेहरों को जगह मिल रही है, इसे लेकर श्रीनगर की वादियों के सियासी माहौल में हलचल है. नजरें इस पर भी टिकी हैं कि कांग्रेस के खाते में कितने मंत्री पद आते हैं और कश्मीर घाटी के साथ जम्मू रीजन को कैसे बैलेंस किया जाता है?
एक विधायक वाली आम आदमी पार्टी से लेकर छह विधायकों वाली कांग्रेस तक, सबकी अपनी डिमांड है. अरविंद केजरीवाल अपने इकलौते विधायक को जिम्मेदारी देने की अपील उमर अब्दुल्ला से कर चुके हैं. वहीं, कांग्रेस भी दो मंत्री पद की डिमांड कर रही है. अब उमर अब्दुल्ला के सामने चुनौती ये है कि मंत्री पद लिमिटेड हैं. जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 के मुताबिक इस केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की संख्या विधानसभा की स्ट्रेंथ के 10 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती.
जम्मू कश्मीर विधानसभा की 90 सीटों के लिए चुनाव हुए थे और उपराज्यपाल की ओर से पांच विधायकों के मनोनयन को भी जोड़ लें तो सदन की स्ट्रेंथ 95 पहुंचती है. 10 फीसदी वाली कैप भी है, ऐसे में मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 9.5 यानि अधिकतम 10 ही हो सकती है. अब मुश्किल ये है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के 42 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं और चुनाव पूर्व गठबंधन में शामिल रही कांग्रेस के छह, सीपीएम के एक विधायक हैं. चुनाव पूर्व गठबंधन से ही 49 विधायक हैं और अब चार निर्दलीय विधायकों ने भी उमर सरकार के समर्थन का ऐलान कर दिया है. आम आदमी पार्टी भी गिव एंड टेक के फॉर्मूले पर समर्थन ऑफर कर चुकी है.
मुख्यमंत्री हटा दें तो मंत्रिमंडल में नौ सदस्यों की ही जगह बचती है और इन नौ पदों के लिए 52 दावेदार हैं. दिग्गजों की भरमार है, 10 साल बाद बनने जा रही सरकार में भागीदारी को लेकर नेताओं की भी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. जम्मू कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक के प्रावधान लागू होने से पहले सूबे में 20 से 25 मंत्री बनाए जाने का ट्रेंड भी रहा है. ऐसे में उमर अब्दुल्ला को मंत्रिमंडल गठन में माथापच्ची करनी पड़ रही है. जानकारी के मुताबिक छह विधायकों वाली कांग्रेस को नई सरकार में एक मंत्री पद मिल सकता है. वहीं, निर्दलीयों और अन्य को खाली हाथ रहना पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें: उमर अब्दुल्ला के शपथग्रहण में दिखेगी विपक्षी एकता की ताकत, इन नेताओं को मिला निमंत्रण
हालांकि, जम्मू कश्मीर के कांग्रेस प्रभारी भरत सिंह सोलंकी ने कहा है कि मंत्री पद को लेकर बातचीत अभी जारी है. आज पार्टी का कोई विधायक मंत्री पद की शपथ नहीं लेगा. उन्होंने ये भी कहा है कि कांग्रेस गठबंधन का मजबूत साझीदार है. गठबंधन में मंत्री पद को लेकर जारी खींचतान और कयासों के बीच संभावित मंत्रियों की लिस्ट भी सामने आई है जिसमें कांग्रेस के कोटे से प्रदेश अध्यक्ष और केंद्र शासित प्रदेश के सबसे अमीर विधायक तारिक हमीद कर्रा का भी नाम है.

दिल्ली पुलिस की महिला कमांडो काजल की हत्या के मामले अब नई परतें खुल रही हैं. उसके परिजनों ने पति अंकुर पर हत्या के साथ-साथ पेपर लीक रैकेट का मास्टरमाइंड होने के गंभीर आरोप लगाए हैं. दावा है कि काजल के पास उसके काले कारनामों के राज़ थे. हत्या से पहले वीडियो कॉल और डंबल से हत्या के आरोपों ने मामले को और सनसनीखेज बना दिया है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में चल रही नकली ब्रांडेड जूतों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का खुलासा किया है. यहां नाइकी, एडिडास, न्यू बैलेंस और स्केचर्स के नकली जूते बनाए जा रहे थे. पुलिस ने यूनिट के मालिक संदीप सिंह को गिरफ्तार कर भारी मशीनें और हजारों नकली जूतों के पार्ट्स बरामद किए हैं.

राजस्थान में साध्वी प्रेम बासा की संदिग्ध मौत. साध्वी प्रेम बासा, जो एक प्रसिद्ध कथा वाचक थीं, का अस्पताल में अचानक निधन हुआ. उनके निधन पर कई सवाल उठे हैं. पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है. परिवार और आश्रम वालों के बीच विवाद भी देखने को मिला है. एक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने मामले को और पेचीदा बना दिया है.

हरियाणा के दादरी जिले में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें बीजेपी विधायक को चमचों से दूर रहने की कड़वी नसीहत एक बुजुर्ग ने दी है. यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. वीडियो में बुजुर्ग की बातों का अंदाज़ साफ दिखता है जो नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाता है. यह घटना लोकतंत्र के अंतर्गत नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच सीधे संवाद की महत्ता को दर्शाती है. ऐसे संवाद समाज में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ाने में मदद करते हैं.









