
कूल, मैच्योर और नो कॉम्प्रोमाइज... केजरीवाल और आतिशी के बीच ये हैं पांच समानताएं
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अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद अब आतिशी दिल्ली की मुख्यमंत्री होंगी. आम आदमी पार्टी की विधायक दल की बैठक के बाद इसका औपचारिक ऐलान कर दिया गया है. आतिशी का नाम खुद अरविंद केजरीवाल ने प्रपोज किया था, जिसका मनीष सिसोदिया समेत सभी विधायकों ने समर्थन किया.
अरविंद केजरीवाल ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर अपनी ही कैबिनेट में मंत्री रहीं आतिशी को चुना है. आतिशी को अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया दोनों की पसंद माना जा रहा है. आखिर क्या वजह है कि केजरीवाल और सिसोदिया ने उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी.
1- केजरीवाल की तरह ही हैं कूल
अरविंद केजरीवाल की राजनीति को जानने वाले ये मानते हैं कि वो विषम परिस्थितियों में भी लगातार संयम बनाए रखते हैं. आतिशी का अंदाज भी कुछ ऐसा ही है. ऐसा माना जाता है कि जब सत्येंद्र जैन और फिर मनीष सिसोदिया के जेल जाने के बाद सौरभ भारद्वाज और आतिशी मंत्री बने तो सौरभ ज्यादा अनुभवी थे क्योंकि उनके पास पहले भी मंत्री पद का अनुभव था लेकिन जल्दी ही अपने संयमित अंदाज से आतिशी नंबर दो की कुर्सी पर पहुंच गईं.
2- केजरीवाल की गैर मौजूदगी में दिखाई मैच्योरिटी:
जब कुछ दिनों के बाद अरविंद केजरीवाल खुद शराब नीति मामले में जेल गए तब अतिशी एक तरीके से दिल्ली सरकार का चेहरा बन गई. दिल्ली के उपराज्यपाल के साथ तालमेल बैठाना हो या फिर विरोधियों पर लगातार सियासी हमले करना उसमें आतिशी और सौरभ भारद्वाज की जोड़ी ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे नेताओं की कमी महसूस नहीं होने दी. यहां भी सौरभ भारद्वाज उपराज्यपाल दफ्तर के निशाने पर रहे क्योंकि वह अति आक्रामक थे, लेकिन आतिशी ने बड़े विभागों की जिम्मेदारी के साथ वहां भी सियासी मैच्योरिटी का नमूना पेश किया.
3- केजरीवाल की तरह शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर:

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