
कुतुब मीनार परिसर पर मालिकाना हक किसका? 12 दिसंबर को फैसला सुनाएगी कोर्ट
AajTak
कुतुब मीनार परिसर में मालिकाना हक को लेकर साकेत कोर्ट ने मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. दिल्ली की साकेत कोर्ट 12 दिसंबर को इस मामले में फैसला सुनाएगी. दिल्ली की साकेत कोर्ट में याचिकाकर्ता कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद द्वारा यह पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी.
कुतुब मीनार परिसर में पूजा के अधिकार की मांग का मामला एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल इस मामले को लेकर साकेत कोर्ट ने मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. दिल्ली की साकेत कोर्ट 12 दिसंबर को इस मामले में फैसला सुनाएगी.
साकेत कोर्ट में याचिकाकर्ता कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद द्वारा यह पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी. दरअसल कुतुब मीनार पर मालिकाना हक के मामले में साकेत कोर्ट ने याचिकाकर्ता कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद की याचिका को खारिज कर दिया था. कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह ने कुतुब मीनार पर मालिकाना हक का दावा करते हुए याचिका दाखिल की थी.
'सरकार ने नहीं ली हमारी इजाजत'
पहले याचिका दाखिल कर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह ने इस मामले में खुद को पार्टी बनाने की मांग की थी. उनकी याचिका में कहा गया था कि सरकार ने 1947 में बिना हमारी इजाजत के पूरी प्रोपर्टी अपने कब्जे में ले ली थी. इस याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया था. ASI ने किया था विरोध
आखिरी बार सितंबर में जब ASI के वकील ने कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि सुलतान बेगम ने लाल किले पर मालिकाना हक का दावा किया था उस याचिका का हमने दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया था. तब भी कोर्ट ने माना था कि याचिका में की गई मांग का कोई आधार नहीं बनता है. ASI ने कुंवर महेंद्र ध्वज प्रसाद सिंह की याचिका खारिज करने की गुहार लगाई थी.

केरल स्टोरी 2 फिल्म को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. मुस्लिम पक्ष इस फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी सरकार का प्रोपेगेंडा बता रहा है. दूसरी ओर, फिल्म मेकर और सरकार के समर्थक कह रहे हैं कि जो भी घटनाएं हुई हैं, उन्हीं पर इस फिल्म की कहानी आधारित है. इसी बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस फिल्म पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

मेघालय के शिलॉन्ग से लोकसभा सांसद रिकी एंड्रयू जे सिंगकों का फुटसल खेलते समय अचानक गिरने के बाद निधन हो गया. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. सक्रिय जनसंपर्क और क्षेत्रीय मुद्दों को संसद में उठाने वाले सिंगकों के निधन से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरा शोक है.











