
कुछ सालों पहले ईसाई-बहुल था लेबनान, बेरूत को कहा गया पूर्व का पेरिस, कब और कैसे बना मुस्लिम देश?
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लेबनान आज से कुछ ही दशक पहले ईसाई बहुल देश हुआ करता था. इसकी राजधानी बेरूत की तुलना पेरिस से होती. यहां की संसद भी क्रिश्चियन-मेजोरिटी थी. लेकिन धीरे से यहां का धार्मिक समीकरण बदला. इसमें बड़ा हाथ गाजा का भी रहा. आज यहां करीब 70 फीसदी आबादी मुस्लिम है.
हिजबुल्लाह समेत कई चरमपंथी गुटों का गढ़ लेबनान कुछ दशक पहले ईसाई देश हुआ करता था. ये ज्यादा पुरानी बात नहीं. यहां तक कि वहां की संसद में भी लगभग 60 फीसदी जगह क्रिश्चियन लीडरों के लिए सुरक्षित थी. फिर यहां कुछ ऐसे बदलाव हुए कि मुस्लिम मेजोरिटी हो गई. यहां तक कि अब लेबनान एक इस्लामिक मुल्क है. जानें, कुछ ही सालों में यहां क्या बदला.
हाल में लेबनान में हुए इजरायली हमले में हिजबुल्लाह के कमांडर नसरल्लाह समेत कई बड़े लीडर मारे गए. इसके बाद से पूरे देश में तबाही मची हुई है. चरमपंथी इस्लामिक संगठनों का होमलैंड बन चुके लेबनान को उसके कट्टरपंथ और यहूदियों-ईसाइयों से नफरत के लिए जाना जाता है. लेकिन ज्यादा नहीं, लगभग पचास साल पहले ये देश खुद क्रिश्चियन मेजोरिटी हुआ करता था, जहां मुस्लिम आबादी 30 फीसदी से भी कम थी.
क्या हो रहा है लेबनान में बीते सप्ताह इजरायली हमले में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह समेत कई लीडर मारे जा चुके. हिजबुल्लाह एक चरमपंथी गुट है, जिसकी पकड़ संसद और सरकार दोनों जगह है. फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर ये इजरायल पर लगातार हमलावर रहा. हाल में संघर्ष ज्यादा बढ़ा, जिसके पीछे हमास का इजरायल पर हमला था. गाजा युद्ध के बीच लेबनान के गुट हिजबुल्लाह ने भी बहती गंगा में हाथ धोने की कोशिश करते हुए इजरायल पर अटैक किए. इसके बाद से पूरे मिडिल ईस्ट में जंग के आसार हैं. यहां खास बात ये है कि हिजबुल्लाह के हेडक्वार्टर वाले देश लेबनान समेत लगभग पूरा मध्यपूर्व एक वक्त पर ईसाई बहुल रहा.
लगभग 90 साल पहले हुई थी आखिरी जनगणना
पचास के दशक में लेबनान में 70 फीसदी क्रिश्चियन थे, जबकि बाकी 30 प्रतिशत में मुस्लिम और अन्य धर्मों को मानने वाले थे. साल 1932 में यहां आखिरी जनगणना हुई. इसके बाद से देश में सेंसस ही नहीं हो रहा. हालांकि यूएस स्टेट डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब यहां पर लगभग 70 फीसदी मुस्लिम हैं. इसमें शिया, सुन्नी और इस्लाइली सब शामिल हैं. बाकी जनसंख्या ईसाई और मिलीजुली है.

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