
कुछ घंटों में बरामद हो गई थी सांसद की छिनी चेन... लेकिन आम लोगों का क्या? दिल्ली में चिंताजनक हैं स्नेचिंग से जुड़े आंकड़े
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दिल्ली में अगस्त से सितंबर 2025 के बीच 1,200 से ज्यादा स्नैचिंग के मामले सामने आए. जिनमें चेन और मोबाइल स्नैचिंग शामिल है. पुलिस ऑपरेशंस, रिकवरी, मिशन रिकनेक्ट और आंकड़ों के साथ पढ़ें Parvez Sagar की ये स्पेशल रिपोर्ट.
Mobile and Chain Snatching Cases in Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अपराध पुलिस के लिए चुनौती बनता जा रहा है और वो जुर्म है स्नैचिंग का. जिसका शिकार आम जन ही नहीं, खास लोग भी हुए हैं. 1 अगस्त से 17 सितंबर 2025 तक यानी 48 दिनों में चेन और मोबाइल स्नैचिंग के सैकड़ों मामले सामने आए हैं, जो दिल्लीवालों के लिए खतरे की घंटी बजा रहे हैं. इस दौरान चेन स्नैचिंग और मोबाइल चोरी के मामलों ने महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं को डर के साए में जीने को मजबूर किया है. हालांकि दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई, ‘ऑपरेशन गोल्डन ट्रैप’ और ‘मिशन रिकनेक्ट’ जैसे प्रयासों ने लोगों को कुछ राहत ज़रूर दी है, लेकिन रिकवरी दर केवल 30-35% ही रही है. आइए जानते हैं, दिल्ली की सड़कों पर छिपे स्नैचिंग खतरों और सुरक्षा उपायों की पूरी कहानी.
सांसद से चेन स्नेचिंग इसी साल 4 अगस्त का दिन था. दिल्ली के हाई सिक्योरिटी वाले चाणक्यपुरी इलाके में सुबह एक सनसनीखेज वारदात से हड़कंप मच गया. वहां मॉर्निंग वॉक पर निकलीं तमिलनाडु की कांग्रेस सांसद आर. सुधा चेन स्नैचिंग का शिकार हो गईं. बेखौफ बदमाश महिला सांसद की गोल्ड चेन लेकर फरार हो गया. दिल्ली पुलिस में हड़कंप मच गया. नई दिल्ली जिला और साउथ जिला पुलिस की कई टीमें एक्शन में थीं. दोनों जिलों की पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन चलाकर आखिरकार आरोपी को धरदबोचा. जांच के दौरान करीब 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई. तकनीकी सर्विलांस और फिजिकल ट्रैकिंग के सहारे आरोपी की शिनाख्त की गई. आरोपी की वह स्कूटी भी बरामद कर ली गई, जिसका इस्तेमाल स्नैचिंग की वारदात में किया गया था. यही नहीं, महज कुछ घंटों में ही पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए महिला सांसद की चेन रिकवर की और उन्हें वापस भी लौटा दी. जाहिर है मामला हाई प्रोफाइल था, तो पुलिस ने कोई कोताही नहीं बरती.
एक आम लड़की से स्नेचिंग ये मामला था एक सांसद की चेन स्नेचिंग की. लाजमी है दिल्ली पुलिस ने बेहद तेजी से काम किया. लेकिन बात अब दिल्ली में रहने वाली एक आम लड़की की. जो नोएडा में काम करती है. प्रियंका एक साल पहले दिल्ली में ही मोबाइल स्नेचिंग का शिकार बनी. लेकिन उनके मामले में आज तक कुछ नहीं हुआ. प्रियंका ने हमसे बातचीत करते हुए बताया कि वो 10 मार्च 2024 की रात थी. उस दिन वह नोएडा में मौजूद अपने ऑफिस से घर जाने के लिए निकली थी. शाम का वक्त था, लेकिन काम में देर हो जाने के कारण करीब रात 9 बजे वो ऑफिस से निकली. वो बाइक से अपने एक दोस्त के साथ दिल्ली के बुराड़ी की तरफ जा रहे थे. प्रियंका अपने दोस्त की बाइक पर पीछे बैठी थी.
रास्ते में काफी ट्रैफिक था, इसलिए उन्होंने एक अलग रास्ता चुना और ITO के पास की एक सड़क से गुजरने लगे. उसे इस इलाके का ज्यादा पता नहीं था, इसलिए वह अपने मोबाइल फोन पर लोकेशन देख-देखकर अपने दोस्त को रास्ता बता रही थी. तभी, अचानक पीछे से एक स्पोर्ट्स बाइक तेज रफ्तार से उनके करीब आई. बाइक पर बैठा शख्स ने एकदम पास आकर प्रियंका के हाथ से मोबाइल फोन झपटा और बिजली की तरह आगे निकल गया. ये सब कुछ पलक झपकते ही हो गया. वो घबराकर जोर-जोर से चिल्लाई, और उसके दोस्त ने बिना देर किए बाइक घुमा कर उसका पीछा किया, लेकिन वह चोर ट्रैफिक और भीड़ का फायदा उठाकर कहीं गायब हो गया.
प्रियंका हमें बताती है, 'घटना से मैं हिल गई थी. जैसे ही होश संभाला, हम पास के पुलिस स्टेशन पहुंचे. वहां मैंने पूरी घटना पुलिस को बताई और अपनी शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मुझे सुना और नोट किया, लेकिन उनकी बात सुनकर मेरा मन और भारी हो गया. उन्होंने साफ कहा कि ऐसे मामलों में मिसिंग फोन वापस मिलना बहुत मुश्किल होता है.'
प्रियंका कहती हैं, 'मेरे लिए यह फोन सिर्फ एक गैजेट नहीं था, उसमें मेरी कई पर्सनल चीजें, यादें और जरूरी फोटोज थीं, जिनका कोई दूसरा विकल्प नहीं था. फोन खोने के साथ मुझे लगा जैसे मेरी निजी जिंदगी का एक हिस्सा भी मुझसे छिन गया हो. इसके बावजूद, मैंने हार नहीं मानी. मैं कई बार पुलिस स्टेशन गई, हर बार इस उम्मीद के साथ कि शायद कोई अच्छी खबर मिले. लेकिन हर बार जवाब वही होता- “अभी तक कोई अपडेट नहीं है.” आज भी वो उम्मीद लगाए बैठी है कि शायद किसी दिन उनका फोन वापस मिल जाए.

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