
कहीं जान का जोखिम, कहीं शव पर सौदेबाजी... प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर लूट की खुली पोल
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आजतक की पड़ताल उन प्राइवेट अस्पतालों के खिलाफ है, जो जीवन बचाने के नाम लूट की दुकान चला रहे हैं. लखनऊ से लेकर मुंगेर और रांची से लेकर भोपाल तक, प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों को नोट छापने की मशीन समझ लिया गया है. आज हम आपको उन परिवारों की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां बताएंगे, जिनकी इलाज के दौरान गाढ़ी कमाई भी गई और अपनों की जान भी गंवानी पड़ी.
सफेद कोट और साफ-सुथरी इमारतों के पीछे छिपा प्राइवेट अस्पतालों का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जो मानवता को शर्मसार करने वाला है. 'आजतक' की पड़ताल में लखनऊ से लेकर मुंगेर और रांची से लेकर भोपाल तक, प्राइवेट अस्पतालों की मुनाफाखोरी और अंधेरगर्दी की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां उजागर हुई हैं.
शहर अलग हैं, मरीज अलग हैं, लेकिन लूट का तरीका एक जैसा है. पैसों की लूट, कथित मेडिकल लापरवाही और इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें. लखनऊ, ग्रेटर नोएडा, मुंगेर, रांची और भोपाल से आई ग्राउंड रिपोर्ट यही सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक प्राइवेट अस्पताल मरीजों की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाते रहेंगे?
लखनऊ: इलाज ने बना दिया जिंदगीभर का मरीज
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 35 वर्षीय नीरज मिश्रा की कहानी प्राइवेट अस्पतालों की कथित मनमानी का बड़ा उदाहरण है. तीन साल पहले नीरज बैटरी रिक्शा दुर्घटना में घायल हो गए थे. इलाज के लिए वे विनोद हॉस्पिटल पहुंचे, जहां कथित तौर पर गलत सर्जरी के बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई. इलाज के नाम पर उनसे बार-बार पैसे जमा कराए गए. एक अन्य अस्पताल में इलाज दिखाया गया, लेकिन रकम विनोद हॉस्पिटल में ली गई. बाद में उन्हें रातों-रात दोबारा विनोद हॉस्पिटल लाया गया, जहां जल्दबाजी में टांके सही तरीके से नहीं लगाए गए.
अंततः एक प्राइवेट अस्पताल में उन्हें 9 से 10 सर्जरी करानी पड़ीं. एक पैर की हालत बिगड़ने पर दूसरे पैर से मांस प्रत्यारोपित किया गया, जिससे दोनों पैर कमजोर हो गए और नीरज चलने-फिरने में असमर्थ हो गए. लगातार इलाज और सर्जरी के कारण नीरज पर करीब 21 लाख रुपये का कर्ज हो गया. आरोप है कि उन्होंने न्याय के लिए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, सीएमओ, एजी मंडल, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक 13 से ज्यादा शिकायतें भेजीं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
वहीं, विनोद हॉस्पिटल के संचालक विनोद मिश्रा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. लखनऊ परिवार कल्याण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि नीरज मिश्रा के पैर के ऑपरेशन के दौरान हुई जटिलताओं के लिए विनोद हॉस्पिटल का प्रबंधन जिम्मेदार है. इस रिपोर्ट के आधार पर सीएमओ ने अस्पताल रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया और अगली सूचना तक अस्पताल की सभी चिकित्सा गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है.

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