
कहानी नमक के शहर की... जमीन से 1000 फीट नीचे बसा एक जादुई संसार
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खाने में नमक की जरूरत तो आप जानते हैं लेकिन सोचिए कोई ऐसा शहर हो जो नमक से ही बना हो. जहां की सड़के, दीवारें, मकान सब नमक से गढ़े गए हों. जहां की हवा में और पानी में भी नमक घुला हो. जहां चारों ओर नमक से बनी कलाकृतियां हों. आइए जानते हैं कि आखिर कैसे रहते हैं लोग नमक के इस शहर में?
सोचिए, अगर आप किसी ऐसे शहर में खड़े हैं जहां की छतें कंक्रीट की नहीं बल्कि सफेद क्रिस्टल की हैं. जहां की दीवारें चाटने पर नमकीन लगती हैं और जहां का गिरजाघर कांच का नहीं बल्कि नमक के पत्थरों को तराश कर बनाया गया है. यह किसी तिलिस्मी कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि पोलैंड के क्राको शहर के पास स्थित विएलिचका साल्ट माइन की हकीकत है. इसे दुनिया 'नमक का शहर' कहती है और यह मानव श्रम और प्रकृति के अद्भुत मिलन की सबसे बड़ी मिसाल है.
धरती के सीने के 1000 फीट नीचे, जहां सदियों से एक समानांतर सभ्यता सांस ले रही है वहां नमक के इस शहर की नींव 13वीं शताब्दी में पड़ी थी. उस दौर में नमक को सफेद सोना कहा जाता था क्योंकि यह न केवल स्वाद के लिए बल्कि मांस और खाने को सुरक्षित रखने का एकमात्र जरिया था. विएलिचका की खदानों ने पोलैंड की अर्थव्यवस्था को सदियों तक संभाला.
वर्तमान नजारा यहां ऐसा है कि जैसे ही आप लकड़ी की 800 सीढ़ियां उतरकर जमीन के नीचे कदम रखते हैं, तापमान अचानक स्थिर हो जाता है और हवा में एक सोंधापन महसूस होता है. यहां 287 किलोमीटर लंबी सुरंगों का एक जाल बिछा है, जो नौ स्तरों में बंटा हुआ है. यह इतना विशाल है कि एक पर्यटक अपनी पूरी जिंदगी में इसका केवल 2% हिस्सा ही देख सकता है.
इस शहर का सबसे चमत्कारी हिस्सा है 'चैपल ऑफ सेंट किंग'. इसे दुनिया का सबसे बड़ा भूमिगत पूजा स्थल माना जाता है. इस गिरजाघर की फर्श की टाइल्स से लेकर वेदी तक, सब कुछ नमक की चट्टानों को काटकर बनाया गया है. छत से लटके हुए विशाल झूमर पहली नजर में कीमती कांच के लगते हैं, लेकिन असल में वे शुद्ध नमक के क्रिस्टल हैं जिन्हें पारदर्शी बनाने के लिए विशेष प्रक्रिया से गुजारा गया है. यहां की दीवारों पर लियोनार्डो दा विंची की प्रसिद्ध पेंटिंग 'द लास्ट सपर' को नमक की दीवार पर उकेरा गया है. इसे देखकर यकीन करना मुश्किल होता है कि ये पत्थर के नमक के टुकड़े हैं.
इस शहर के अंदर कई खारी झीलें हैं. इन झिलों का पानी इतना ज्यादा नमकीन है कि इसमें इंसान बिना किसी मेहनत के तैर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे 'डेड सी' में.
लेकिन यह शहर केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि इलाज के लिए भी मशहूर है. यहां की हवा सूक्ष्म नमक के कणों से भरी होती है, जिसमें बैक्टीरिया नहीं पनप पात. यहां एक भूमिगत सेनेटोरियम बनाया गया है. डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, अस्थमा, एलर्जी और श्वसन रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए यहां की हवा किसी संजीवनी से कम नहीं है. इसे हैलोथैरेपी कहा जाता है, जहां लोग फेफड़ों को साफ करने के लिए धरती के नीचे कई घंटे बिताते हैं.

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