
कड़े फैसले क्यों लिए? आसन पर लौटकर ओम बिरला ने विपक्ष को बता दी लक्ष्मण रेखा
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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद सदन की कार्यवाही का संचालन करने चेयर पर लौट आए हैं. स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा को लेकर बोलते हुए विपक्ष के लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी है.
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ आया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया था. अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद गुरुवार को ओम बिरला सदन की कार्यवाही का संचालन करने आसन पर आए. स्पीकर ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सदन का धन्यवाद किया और विपक्ष की ओर से लगाए गए एक-एक आरोप पर पलटवार किया. उन्होंने विपक्ष को नसीहत, हिदायत दी और आने वाले समय के लिए लक्ष्म रेखा भी खींच दी.
स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में तीसरी बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास के प्रस्ताव पर चर्चा हुई. 12 घंटे चर्चा हुई, जो सबसे अधिक चर्चा रही ताकि सभी सदस्यों के विचार, तर्क और चिंताएं सदन के सामने आ सकें. उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष के सदस्यों ने मेरी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए और यह भी कहा गया कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है. ओम बिरला ने कहा कि यह सदन भारत की 140 करोड़ जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता हैं.
उन्होंने कहा कि हमेशा मेरा प्रयास रहा कि सदन में हर सदस्य को नियमों के तहत अपने विचार व्यक्त करने के लिए सभी को पर्याप्त अवसर मिल सके. यह सदन समाज के हर व्यक्ति की आवाज बने, ऐसा प्रयास किया. स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सदन की कार्यवाही में सभी को हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करने का प्रयास भी किया. उन्होंने कहा कि सदन में बोलने से संकोच करने वाले सदस्यों को चैंबर में बुलाकर आग्रहपूर्वक कहा कि वे अपने क्षेत्र की आवाज सदन में रखें.
स्पीकर ओम बिरला ने एलओपी को बोलने नहीं देने के आरोप पर कहा कि प्रधानमंत्री हों या मंत्री, सभी को नियमों के तहत पहले नोटिस देना होता है और उसके बाद उनको बोलने की अनुमति दी जाती है. कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है. उन्होंने कहा कि यहां किसी को विशेषाधिकार नहीं है. नियमों से हटकर किसी को भी विशेषाधिकार नहीं दिया जा सकता. स्पीकर ने का कि सदन में नियमों के सम्मान की परंपरा रही है. यह नियम मैंने नहीं बनाए हैं, ये मुझे विरासत में मिले हैं.
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी को जम्मू कश्मीर से संबंधित फोटो सदन में दिखाने की अनुमति चेयर ने नहीं दी और तब उन्होंने इसका पालन किया था. स्पीकर ने कहा कि साल 1958 में किसी सदस्य ने सदन में सरकारी दस्तावेज रखे थे, तब भी चेयर ने उसे इसके लिए अनुमति नहीं दी थी. माइक बंद किए जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि माइक के बटन का कंट्रोल चेयर के पास नहीं होता. चेयर से जिसे अनुमति मिलती है, उसका माइक ऑन हो जाता है.
स्पीकर ओम बिरला ने महिला सांसदों के प्रोटेस्ट और उस पर टिप्पणी को लेकर कहा कि जिस तरह वह वेल में आईं और दूसरी ओर चली गईं, सदन में कुछ भी अप्रत्याशित हो सकता था. उन्होंने कहा कि इसलिए फैसला लिया कि सदन के नेता को अंदर नहीं आना चाहिए और यही आग्रह किया. स्पीकर ने कहा कि सदन की प्रक्रिया लागू करना मेरा दायित्व है और सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए कठोर फैसले लेने पड़ते हैं. यह सदन नियमों से चलता है. सदन की मर्यादा को बनाने, अच्छी परंपराएं बनाने का प्रयास हम सभी को करना चाहिए.

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