
एयर एंबुलेंस में ब्लैक बॉक्स ही नहीं था! कैसे सामने आएगा झारखंड प्लेन क्रैश का सच
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विमान ने शाम करीब 7 बजकर 11 मिनट पर रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. टेक-ऑफ के करीब 23 मिनट बाद इसका एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए. उससे पहले मौसम खराब होने के चलते पायलट ने रूट बदलने की अनुमति मांगी थी. हादसे की जगह झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया के पास जंगल क्षेत्र में बताई गई है.
झारखंड के चतरा में हादसे का शिकार हुए रेडबर्ड एयरवेज के विमान में न तो कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) लगा था और न ही फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR). यानी इस विमान में वह 'ब्लैक बॉक्स' मौजूद नहीं था जो किसी भी विमान दुर्घटना की जांच में सबसे अहम सबूत माना जाता है.
नियम क्या कहते हैं?
CVR यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को लेकर नियम है कि 5700 किलोग्राम से ज्यादा अधिकतम टेक-ऑफ वज़न वाले विमानों, जिनका एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट 1 जनवरी 1987 के बाद जारी हुआ हो, उनमें CVR होना जरूरी है. वहीं FDR को लेकर सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (CAR), सेक्शन-2, सीरीज I, पार्ट V के पैरा 4.1.2 के मुताबिक, 5700 किलोग्राम या उससे कम वज़न वाले मल्टी-इंजन टर्बाइन विमानों, जिनका एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट 1 जनवरी 1990 के बाद जारी हुआ हो, उनमें FDR लगाया जाना चाहिए.
रेडबर्ड का कौन सा विमान था?
हादसे का शिकार हुआ विमान Beechcraft C90 (ट्विन टर्बोप्रॉप) था, जिसका रजिस्ट्रेशन VT-AJV था. अधिकतम टेक-ऑफ वजन: 4583 किलोग्राम निर्माण वर्ष: 1987 पहला एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट: 1987 में जारी
चूंकि यह विमान 5700 किलोग्राम से कम वजन का है और इसका पहला सर्टिफिकेट 1 जनवरी 1990 से पहले जारी हुआ था, इसलिए उस समय के नियमों के तहत इसमें CVR और FDR लगाना अनिवार्य नहीं था. इसी वजह से इस विमान में ब्लैक बॉक्स मौजूद नहीं था.

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