
एक तरफ बीजेपी, दूसरी तरफ नीतीश-तेजस्वी, 2024 के लिए बिहार के बाकी दलों का क्या है स्टैंड?
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बिहार में लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता की कवायद में जुटे नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव एक तरफ हैं. दूसरी तरफ 12 दल हैं. इन 12 दलों में कौन किस तरफ है, या किस तरफ जा सकता है, इस पर कयास लगाए जाने लगे हैं. नीतीश से अलग होकर मांझी क्या करेंगे इस पर भी अटकलें लग रही हैं.
सियासत में कोई किसी का सगा नहीं होता. बिहार की राजनीति तो निष्ठा बदलने के उदाहरणों से भरी पड़ी है. यहां कौन कब किसका दोस्त बन जाए और कौन कब किससे दोस्ती तोड़ विरोधी खेमे की ओर से मैदान संभाल ले, ये कहा नहीं जा सकता. अब चूंकि 2024 के चुनाव में एक साल से भी कम का वक्त बचा है यही दोस्ती-दुश्मनी का खेल राज्य के राजनीतिक दलों ने शुरू कर दिया है. इसके अगुआ बने हैं हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा यानी हम के जीतनराम मांझी. जीतनराम मांझी के बेटे संतोष मांझी ने मंगलवार को नीतीश सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. इसके साथ ही ये साफ हो गया कि बिहार में अब महागठबंधन के कुनबे में एक पार्टी कम हो गई है. गैर एनडीए दलों को एकजुट करने, किसी निष्कर्ष पर पहुंचकर साझा रणनीति बनाने और केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को मजबूत चुनौती पेश करने की कोशिश में जुटे नीतीश के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है.
बिहार में लोकसभा चुनाव के लिए बिछी सियासी बिसात पर एक तरफ नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव हैं तो दूसरी तरफ 12 दल. इन 12 दलों में विपक्षी बीजेपी भी शामिल है. एक तरफ महागठबंधन है तो दूसरी तरफ बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए. कांग्रेस भी सत्ताधारी महागठबंधन में ही शामिल है, ऐसे में उसे लेकर भी किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं है लेकिन मांझी के महागठबंधन से नाता तोड़ने के बाद गठबंधनों के गणित पर भी चर्चा शुरू हो गई है.
बिहार के बदलते सियासी समीकरणों के बीच कौन पार्टी कब किस गठबंधन का हिस्सा बन जाएगी, इसे लेकर जानकार भी कह रहे हैं- कुछ कहा नहीं जा सकता. कुछ दल पहले से ही किसी न किसी गठबंधन का हिस्सा हैं तो वहीं कुछ ऐसे दल या नेता भी हैं जो विधानसभा चुनाव के बाद या पिछले कुछ समय से लापता से चल रहे हैं. मुखर रहने वाले पशुपति पारस मौन हैं तो सभी विधायकों के पाला बदल लेने के बाद बीजेपी के खिलाफ हुंकार भरते नजर आए विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी की सक्रियता कम ही दिख रही है. विधानसभा चुनाव से पहले शोर-शराबे के साथ अस्तित्व में आई पुष्पम प्रिया की पार्टी भी निष्क्रिय नजर आ रही है.
अप्रैल से ही लग रहे थे मांझी के अलग होने के कयास
जीतनराम मांझी की पार्टी ने महागठबंधन से तो नाता तोड़ लिया है लेकिन अगला कदम क्या होगा? इसे लेकर अभी कुछ नहीं कहा है. हालांकि, कहा ये जा रहा है कि मांझी की पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए के विस्तार को लेकर काम कर रही बीजेपी के साथ जा सकती है. इन कयासों को जीतनराम मांझी की 13 अप्रैल को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने पहले ही हवा दे दी थी. शायद इस बात का अंदाजा सीएम नीतीश कुमार को भी पहले ही हो गया था. नीतीश ने विपक्ष की बैठक के लिए जीतनराम मांझी को न्यौता नहीं दिया था. एनडीए में शामिल होगी मांझी की पार्टी
बिहार के ताजा सियासी घटनाक्रम और गठबंधन के कनफ्यूजन को लेकर पत्रकार आलोक जायसवाल कहते हैं कि ये तो होना ही था. उन्होंने कहा कि मांझी के बीजेपी के संपर्क में होने की बातें बिहार में लंबे समय से हो रही थीं. बिहार के बीजेपी के नेताओं से लंबी बातचीत के बाद मांझी दिल्ली गए थे और अमित शाह से मुलाकात की थी.

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