
एक कोठी, दो आरोपी और 16 मामले... यूं जेल से रिहा हुआ निठारी केस का आरोपी पंढेर, पढ़ें इनसाइड स्टोरी
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निठारी केस के सामने आने के बाद पुलिस ने वैसे तो पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के खिलाफ कुल 19 मामले दर्ज किए थे, लेकिन शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने खुद ही तीन मामलों को खारिज कर दिया था. जिसके बाद दोनों के खिलाफ कुल 16 मामले चले.
Nithari Case: पूरे देश को दहला देने वाले निठारी कांड के दो आरोपियों में से एक यानी डी-5 कोठी का मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर आखिरकार 17 साल बाद जेल से रिहा हो गया है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पंढेर को निठारी कांड से जुड़े सारे मामलों में बरी कर दिया था. इसके बाद बीते शुक्रवार को उसे गौतमबुद्ध नगर की जिला जेल से रिहा कर दिया गया. हाई कोर्ट के फैसले के बाद उसकी रिहाई का परवाना पहले ही जेल पहुंच गया था, लेकिन डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन में समय लगने की वजह से पंढेर की रिहाई में देरी हुई.
जेल से रिहा होकर चंडीगढ़ चला गया पंढेर शुक्रवार को जेल से बाहर आने के दौरान उसने कुर्ता पायजामा पहन रखा था और उसके साथ उसका एक सहयोगी था, जिसके पास पंढेर का एक बैग था. रिहाई की फॉर्मेलिटी पूरी करवाने के लिए तीन वकील भी जेल पहुंचे थे. जाहिर है इतने भयानक मामले के एक आरोपी के यूं रिहा हो जाने पर जेल गेट के बाहर आम लोगों के साथ-साथ मीडियाकर्मी भी मौजूद थे, जिन्होंने पंढेर से इस केस से जुड़े सवाल पूछे, लेकिन पंढेर ने कोई जवाब देने की जगह सिर्फ हाथ जोड़ लेना ही मुनासिब समझा. पंढेर अपने वकीलों के साथ गाड़ी में बैठ कर सीधे चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गया.
पुलिस के बाद सीबीआई ने की तफ्तीश निठारी केस के सामने आने के बाद पुलिस ने वैसे तो पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के खिलाफ कुल 19 मामले दर्ज किए थे, लेकिन शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने खुद ही तीन मामलों को खारिज कर दिया था. जिसके बाद दोनों के खिलाफ कुल 16 मामले चले. आगे चल कर सीबीआई ने भी इन 16 के 16 मामलों की तफ्तीश की. यानी पंढेर के खिलाफ निठारी कांड में आईपीसी की धारा 302 के तहत कत्ल, 376 के तहत रेप, 201 के तहत सबूत मिटाने और 120बी के तहत एक राय होकर आपराधिक साजिश रचने समेत तमाम गुनाहों के कुल 16 मामले थे.
ऐसे खत्म हो गए 16 केस इन मामलों में गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट में ट्रायल चला, लेकिन पंढेर के खिलाफ सिर्फ 6 मामले ही साबित हुए. इन 6 में से 3 मामलों में सीबीआई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में पंढेर को बरी कर दिया. बाकी बचे 3 मामलों में पंढेर को लोअर कोर्ट से फांसी की सजा हुई थी. जिसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. इनमें से हाई कोर्ट ने उसे एक केस में कुछ साल पहले बरी कर दिया था. बाकी बचे दो मामलों में हाई कोर्ट ने ही उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया और इस तरह पंढेर के खिलाफ दर्ज 16 के 16 मामले एक-एक कर खत्म हो गए.
12 मामलों में कोली भी बरी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पंढेर की तरह उसके नौकर सुरेंद्र कोली को भी 12 मामलों में फांसी की सजा खारिज करते हुए सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. लेकिन रिंपा हलधर केस में फिलहाल कोली की एक अपील सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है. इस मामले में उसे फांसी और फिर उम्र कैद की सजा हुई थी, जिसके खिलाफ उसने सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है. लिहाजा हाई कोर्ट से 12 मामलों में बरी होने के बावजूद फिलहाल कोली की रिहाई भी अभी अटकी है.
सुप्रीम कोर्ट में लंबा खिंच सकता है मामला उधर, पंढेर बेशक रिहा हो चुका हो, सीबीआई इलाहाबाद हाई कोर्ट से मिली इस शिकस्त के बाद फिर से कोली और पंढेर केस में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रही है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का नतीजा कब तक निकलेगा और क्या निकलेगा, ये फिलहाल कोई नहीं जानता. हां आरुषि मर्डर केस जैसे तमाम मामलों को देख कर ये अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने से मामला कितना लंबा खिंच सकता है.

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