
एक किलो चावल भी नहीं खरीद पा रहे लोग, पाकिस्तान की तरह इस मुस्लिम देश पर भी छाया है संकट
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मिस्र के लोग बढ़ती महंगाई से बेहद परेशान हैं. लोग अपनी जरूरत की चीजों को भी नहीं खरीद पा रहे हैं और खानपान में भी कटौती कर रहे हैं. अपने पैसे को भी वो बैंकों से नहीं निकाल सकते क्योंकि बैंकों ने निकासी प्रतिबंधित कर दी है. विश्लेषक कह रहे हैं कि यह स्थिति बहुत हद तक राष्ट्रपति अब्देल फत्तेह अल-सीसी की गलत नीतियों का नतीजा है.
मध्य-पूर्व की सबसे अधिक आबादी वाला देश मिस्र वर्तमान में गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. लोग खाने-पीने की चीजें आसानी से नहीं खरीद पा रहे और मूलभूत जरूरतों में भी कटौती करने को मजबूर हैं. नौकरीपेशा वर्ग का वेतन आधा हो गया है और लोग बैंकों में जमा अपने ही पैसे को नहीं निकाल पा रहे क्योंकि बैंकों ने निकासी को प्रतिबंधित कर दिया है. देश की मुद्रा पाउंड में भारी अवमूल्यन हुआ है जिससे महंगाई बेतहाशा बढ़ गई है.
काहिरा के शौबरा में रहने वाले 40 साल के एकाउंटेंट अहमद हसन ने एक वेबसाइट को बताया कि उनके तीन बच्चे हैं और महंगाई के बीच सबका पेट पालना मुश्किल हो रहा है. हसने कहते हैं, 'जब हम खरीदारी करने जाते हैं तो तीन किलोग्राम चावल खरीदने के बजाय, हम सिर्फ एक किलो या आधा किलो चावल ही खरीद पाते हैं. हम अपना खर्च कम करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन हम क्या-क्या खरीदना छोड़ें...हमारे बच्चों को कई चीजों की बहुत जरूरत होती है.'
मुद्रास्फीति 20% से अधिक
अक्टूबर 2022 के अंत से मिस्र की मुद्रा का लगभग एक तिहाई अवमूल्यन हुआ है और मुद्रास्फीति वर्तमान में 20% से अधिक है. कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि स्थिति इससे भी बदतर है. उनका कहना है कि मुद्रास्फीति फिलहाल 101 % तक हो सकती है.
कई विशेषज्ञ यह कह रहे हैं कि मिस्र मध्य-पूर्व के देश लेबनान की राह पर है. लेबनान साल 2019 से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है जहां के लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं.
लेबनान और मिस्र के बीच बड़ी समानताएं

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