
एक कार, 4 आरोपी और अंजलि की मौत का सस्पेंस... ये है कंझावला कांड के उन 14 घंटों की पूरी कहानी
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कंझावला कांड में पुलिस ने पिछले एक सप्ताह से ज्यादा का जो वक्त इस केस की जांच में लगाया है. उसमें हर दिन कोई ना कोई झोल सामने आ रहा है. ना जाने क्यों पुलिस पहले ही दिन से इस मामले में लापरवाह नजर आ रही है. लेकिन बाद में पुलिस ने साफ कर दिया कि इस केस के महज 4 आरोपी हैं, जो उस रात कार में सवार थे.
दिल दहला देने वाले कंझावला कांड पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो गुनहगारों को कड़ी से कड़ी सजा दिलवाएगी. मगर साथ ही वो ये भी कहती है कि आरोपियों का इरादा या मकसद अंजलि के कत्ल का नहीं था. इसलिए यह मामला गैर इरादतन हत्या का है. यानी आईपीसी की धारा 304 के तहत 10 साल की सजा का प्रावधान है और इसमें अधिकतम सजा उम्रकैद होती है. अब यह कहानी पुलिस के मुताबिक 4 आरोपियों और अंजलि की सहेली निधि के ईर्द-गिर्द ही घूमती नजर आती है.
अब अंजलि के 4 गुनहगार! कंझावला कांड की बात करें तो पुलिस ने पिछले एक सप्ताह से ज्यादा का जो वक्त इस केस की जांच में लगाया है. उसमें हर दिन कोई ना कोई झोल सामने आ रहा है. ना जाने क्यों पुलिस पहले ही दिन से इस मामले में लापरवाह नजर आती रही. लेकिन बाद में पुलिस ने साफ कर दिया कि इस केस के महज 4 आरोपी हैं, जो उस रात कार में सवार थे. इस कहानी के वो चार किरदार कुछ इस तरह से हैं.-
- पहला 25 साल का अमित खन्ना जो उत्तम नगर में एसबीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग में काम करता है. - दूसरा 27 साल का कृष्ण जो कनॉट प्लेस में स्पेनिश कल्चर सेंटर में काम करता है. - तीसरा 26 साल का मिथुन जो पेशे से हेयर ड्रेसर है. - चौथा 27 साल का मनोज मित्तल जिसकी सुलतानपुरी में राशन की दुकान है और साथ ही इलाके का बीजेपी नेता है.
पुलिस की छानबीन में पांचवा शख्स दीपक आरोपी था ही नहीं. वो महज अपने भाई अमित को बचाने के लिए उसका इल्जाम अपने सिर ले रहा था.
चार आरोपियों की कहानी इन चारों ने 31 दसंबर 2022 की शाम मुरथल में न्यू ईयर का जश्न मनाने का फैसला किया. इसी के बाद अमित, कृष्ण और मिथुन शाम करीब छह बजे अपने अपने घर से सुलतानपुरी में मनोज मित्तल की दुकान पर पहुंचे. दुकान बंद हो चुकी थी. इसके बाद चारों ने उसी दुकान में शराब पी. शराब का ये दौर रात करीब दस बजे तक चला.
आशुतोष नहीं, लोकेश है कार का मालिक रात करीब साढ़े दस बजे के दरम्यान कहानी में पांचवें किरदार की एंट्री होती है. इस किरदार का नाम है आशुतोष. नोएडा की एक टेक फर्म में काम करने वाले आशुतोष से अमित की दोस्ती है. अमित शराब पीने के बाद आशुतोष से मुरथल जाने के लिए उसकी मारुति बलेनो कार मांगने उसके घर जाता है. ये कार दरअसल आशुतोष की भी नहीं थी. कार का असली मालिक लोकेश है. आशुतोष लोकेश का साला है. मगर लोकेश की ये कार कुछ दिनों से आशुतोष के पास थी.

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