
उपराष्ट्रपति बनने की मेर कोई इच्छा नहीं थी, बीजेपी झूठ बोल रही: नीतीश कुमार
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सुशील मोदी ने दावा किया था कि नीतीश भारत के उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे. जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने यह बात केंद्रीय मंत्रियों तक भी पहुंचाई थी. अब इस पर पलटवार करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी कभी ऐसी इच्छा नहीं थी कि वे राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति बनें, इसलिए उन्होंने दोनों चुनाव में बीजेपी की समर्थन भी किया था.
नीतीश कुमार ने बुधवार को 8वीं बार बिहार के सीएम पद की शपथ ली. सीएम बनने के बाद नीतीश कुमार लगातार बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं. इसी बीच गुरुवार को उन्होंने बीजेपी नेता सुशील मोदी के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे. नीतीश कुमार ने कहा कि उनकी ऐसी कोई इच्छा नहीं थी. ये बोगस बात है.
दरअसल, हाल ही में सुशील मोदी ने दावा किया था कि नीतीश भारत के उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे. जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने यह बात केंद्रीय मंत्रियों तक भी पहुंचाई थी. नीतीश कुमार ने उपराष्ट्रपति बनने की इच्छा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, जिसके मन में जो आता है बोल रहा है. एक आदमी (सुशील मोदी) को देखा नहीं, कह रहे हैं कि हम उपराष्ट्रपति बनना चाहते थे. एकदम बोगस बात है. आप लोगों को उनसे पूछना चाहिए था. हमने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्हें समर्थन किया. इसके बाद हमने अपनी पार्टी की बैठक बुलाई और अलग हुए.
खेमा बदलते ही नीतीश के कड़े हो गए तेवर... शपथ लेते ही इन पांच बयानों से दिए भविष्य के संकेत नीतीश कुमार ने बोले- मुझ पर निशाना साधने से मिल जाएगा पद
राज्यसभा सांसद सुशील मोदी का नाम लिए बगैर नीतीश कुमार ने कहा कि ये जो लोग बोल रहे हैं, उन्हें कुछ बनाया नहीं गया. अब ये लोग मेरे खिलाफ बोल रहे हैं. अच्छा है कि ये लोग मेरे खिलाफ बोलेंगे, तो उनको फिर जगह मिल जाएगी. इन लोगों के लिए हमको कुछ नहीं कहना है.
दरअसल, सुशील मोदी पिछली सरकार में डिप्टी सीएम थे. हालांकि, इस बार उन्हें बिहार सरकार में शामिल नहीं किया गया था. हालांकि, उन्होंने पार्टी ने राज्यसभा भेजा था. इसके बाद चर्चा थी कि सुशील मोदी को मोदी सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है. हालांकि, उन्हें मोदी कैबिनेट में भी शामिल नहीं किया गया. ऐसे में नीतीश कुमार ने अब उन पर पलटवार किया.

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