
उत्तराखंड: जंगलों की जमीन पर अवैध मजार, मौलाना बोले- शेर भी आकर टेकता है माथा
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Uttarakhand jim Corbett: उत्तराखंड का जिम कार्बेट नेशनल पार्क चर्चा में आ गया है. इसकी वजह टाइगर नहीं है बल्कि बाघों के संरक्षण के लिए बने देश के सबसे पुराने नेशनल पार्क में मजारों की आई बाढ़ है. जिम कार्बेट में मजारों की बढ़ती संख्या से सरकार एक्शन में आ गई है. वन क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए एक्शन लेने की बात कही है.
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में गैर कानूनी मजारें बनाकर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण किया जा रहा है. उत्तराखंड के कालाढूंगी के जंगलों के पास दोनों तरफ सड़क के किनारे आपको बड़ी संख्या में मजारें नजर आएंगी. उत्तराखंड में अब तक एक हजार से ज्यादा मजारों को चिन्हित किया जा चुका है, जो वन विभाग या सरकार की दूसरी जमीनों पर अवैध कब्जा करके बनाई गई हैं. इनमें से अब तक 102 मज़ारों को सरकार द्वारा ध्वस्त किया भी जा चुका है. इन मज़ारों की जांच की गई तो ये पता चला कि इन मज़ारों में जो कब्र बनी हुई हैं, उनमें से कई में मृत व्यक्ति के अवशेष नहीं हैं.
इन खुलासों के बीच आजतक की टीम आज जिम कॉर्बेट के बाद रामनगर से 30 किलोमीटर दूर कालाढूंगी के जंगलों के बीचों बीच बने मजारों तक पहुंची. यहां प्रवेश वर्जित है. उसके बाद भी मज़ार बनी हैं. मौके पर मौजूद मौलाना बताते हैं कि यह मज़ार कालू सैयद पीर के नाम पर बनी है, जबकि आजतक ने रामनगर में भी पड़ताल के दौरान इसी नाम पर कई मज़ार वहां पाई थीं.
'जिसकी जहां मान्यता वहां बना ली मज़ार'
मौलाना कहते हैं कि कालू सैयद के नाम पर सैकड़ों मजारे बनाई हैं, जिसकी जहां मान्यता वहां इन्हीं के नाम पर मजार बना देते हैं, उत्तराखंड में कई जगह इसी नाम पर है जबकि गुजरात के रेलवे स्टेशन पर भी है. जबकि मौलाना को खुद यह नहीं पता कि असल में कालू सैयद की मौत कहां हुई थी? उसके बाद भी सैकड़ों जगह अवैध मज़ारें खड़ी हैं.
मज़ार के पास ही लोगों ने बनाया घर
मज़ार के सामने ही इन लोगों ने घर बसा रखा है, जिसमे महिला के साथ साथ छोटे बच्चे भी हैं. इतना ही नहीं मौलाना के मुताबिक, हर बृहस्पतिवार रात को एक शेर मजार पर आता है और माथा टेक कर जाता है, हाथी भी आता है और माथा टेक कर जाता है, और कोई जानवर इन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है.

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