
'ईरान से हमारा भाईचारा, उस पर अमेरिका के हमलों की करते हैं निंदा', पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का बयान
AajTak
पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब मध्य-पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील हैं और अमेरिका व इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों से ईरान, लेबनान, सीरिया समेत कई देशों में तनाव चरम पर है. ईरान पर हुए हमले को लेकर जहां चीन और रूस ने संयम बरतने की अपील की है, वहीं पाकिस्तान ने प्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ खड़ा होकर अपने रुख को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है.
पाकिस्तान ने हाल ही में ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों को लेकर अपनी स्थिति बेहद कड़ी और स्पष्ट रूप में सामने रखी है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान न सिर्फ हमारा पड़ोसी है, बल्कि भाईचारा रखने वाला देश भी है, और उस पर हमला पूरे क्षेत्र की शांति के लिए गंभीर खतरा है.
प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा, "हमने ईरान पर हुए हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है. ये निंदा सबसे उच्च स्तर पर दर्ज कराई गई है. पाकिस्तान क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सिद्धांतों का पूर्ण समर्थन करता है."
पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब मध्य-पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील हैं और अमेरिका व इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों से ईरान, लेबनान, सीरिया समेत कई देशों में तनाव चरम पर है. ईरान पर हुए हमले को लेकर जहां चीन और रूस ने संयम बरतने की अपील की है, वहीं पाकिस्तान ने प्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ खड़ा होकर अपने रुख को काफी हद तक स्पष्ट कर दिया है.
बता दें कि इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने भी यहूदी देश पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी थीं. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सर्वोच्च नेता खामेनेई को युद्ध रोकने की धमकी दी थी. हालांकि ईरान ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी. इसके बाद अमेरिका ने ईरान की परमाणु साइटों को निशाना बनाया था. तब भी पाकिस्तान समेत कई देशों ने इस हमले की खुलकर निंदा की थी.

इजरायल की Haifa Refinery पर हुए ईरानी हमले में अहम बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है. हमला रिफाइनरी से जुड़े एक थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ, जो ऑपरेशन के लिए जरूरी था. कंपनी के मुताबिक, कुछ दिनों में फिर से पूरी तरह संचालन शुरू होने की उम्मीद है. ज्यादातर प्रोडक्शन यूनिट्स फिलहाल चालू हैं. देखें वीडियो.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.







