
ईरान के जुर्माने से बचने के लिए पाकिस्तान ने उठाया ये कदम तो अमेरिका ने दी प्रतिबंध लगाने की चेतावनी
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अमेरिका ने पाकिस्तान को पाक-ईरान गैस पाइपलाइन परियोजना को लेकर चेतावनी दी है. अमेरिका ने पाकिस्तान को इस परियोजना को रोकने की सलाह दी है. अगर पाकिस्तान ऐसा नहीं करता है तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. इस प्रोजेक्ट को लेकर मई 2009 में पाकिस्तान और ईरान के बीच समझौता हुआ था.
ईरान के साथ गैस पाइपलाइन परियोजना ने पाकिस्तान के लिए आगे कुंआ, पीछे खाई की स्थिति पैदा कर दी है. ईरान के संभावित जुर्माने से बचने के लिए पाकिस्तान ने शेष परियोजना को लेकर निर्माण कार्य शुरू करने का फैसला किया था. लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान, ईरान के साथ व्यापार करता है तो उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है.
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने मंगलवार को कहा कि जैसा कि अमेरिका के असिस्टेंट सेक्रेटरी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हम इस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने का समर्थन नहीं करते हैं. ऐसे में पाकिस्तान अगर ईरान के साथ व्यापार करता है तो हमारे प्रतिबंधों के दायरे में आने का खतरा है.
अमेरिकी विदेश विभाग के नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंगलवार को मैथ्यू मिलर से जब पूछा गया, "पिछले सप्ताह असिस्टेंट सेक्रेटरी डोनाल्ड लू ने कहा था कि अमेरिका इस पक्ष में नहीं है कि पाकिस्तान ईरान के साथ पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर काम शुरू करे. ऐसे में पाकिस्तान कुछ कानूनी फर्मों से बातचीत कर रहा है कि क्या अमेरिका इस मामले में छूट दे सकता है या नहीं?"
इसका जवाब देते हुए मैथ्यू मिलर ने कहा, "जैसा कि मैं कभी भी इस तरह से किसी प्रतिबंध या एक्शन का अनुमान नहीं लगाता हूं. इस मामले में भी मैं किसी भी तरह की संभावित कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. लेकिन हम हमेशा सभी को सलाह देते हैं कि ईरान के साथ व्यापार करने से हमारे प्रतिबंधों के दायरे में आने का खतरा है. हम सभी देशों को इस मामले में सावधानी से विचार करने की सलाह देंगे. पिछले सप्ताह असिस्टेंट सेक्रेटरी ने भी स्पष्ट किया था कि हम इस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं."
पाकिस्तान में चीनी इंजीनियरों पर हुए आतंकी हमले को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए मिलर ने कहा कि हम पाकिस्तान में पीआरसी इंजीनियरों के काफिले पर हुए हमले की निंदा करते हैं. हमले से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं.
अमेरिका ने जताई थी चिंता

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

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