
इस्लाम पर हमलावर रहने वाले सऊदी क्राउन प्रिंस के दोस्त की चर्चा क्यों?
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अली अल-हुवैरिनी सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निकट सहयोगी थे. इस्लामिक इतिहास को लेकर अपने विवादित बयानों के कारण वो चर्चा में रहे. हाल ही में उन्होंने इस्लाम का स्वर्ण युग माने जाने वाले अल-अंडालस में मुस्लिम शासकों के शासन को अरब का पिछड़ापन कहा था.
सऊदी अरब अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि बदलने की कोशिश में लगा हुआ है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान कई ऐतिहासिक सुधार कर रहे हैं जिससे देश के भविष्य को लेकर रूढ़िवादियों और प्रगतिशील लोगों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. इसी बीच मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले सप्ताह अपने एक निकट सहयोगी अली अल-हुवैरिनी को खो दिया जो इन सुधारों में उनके साथ खड़े थे.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











