
इलेक्टोरल बॉन्ड पर SBI ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा और समय, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
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सुप्रीम कोर्ट ने बीते फरवरी में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि ये संविधान के तहत सूचना के अधिकार, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने चुनावी बॉन्ड योजना की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था.
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने चुनावी बॉन्ड योजना को 'असंवैधानिक' करार देते हुए राजनीतिक पार्टियों को इलेक्टोरल बॉन्ड से मिलने वाले चंदे के बारे में जानकारी साझा करने का निर्देश दिया था. इसके लिए कोर्ट ने छह मार्च 2024 तक का समय बैंक को दिया था. लेकिन एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर अनुरोध किया है कि उन्हें इसके लिए 30 जून तक का समय दिया जाए.
अदालत ने 12 अप्रैल 2019 से लेकर अब तक खरीदे गए इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को देने का निर्देश दिया था. लेकिन अब एसबीआई ने कहा है कि वह अदालत के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करने करना चाहता है. हालांकि, डेटा को डिकोड करना और इसके लिए तय की गई समय सीमा के साथ कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वालों की पहचान छुपाने के लिए कड़े उपायों का पालन किया गया है. अब इसके डोनर और उन्होंने कितने का इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदा है, इस जानकारी का मिलान करना एक जटिल प्रक्रिया है.
ऐसे में इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को सौंपने में एसबीआई की ओर से की जा रही देरी पर कानूनी विशेषज्ञों ने नाराजगी जाहिर की है. कानूनी विशेषज्ञ अंजलि भारद्वाज ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी मुहैया कराने में देरी करने पर निराशा जताते हुए कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले डोनर्स की जानकारी और से चंदा देने की के डोनर की जानकारी एसबीआई की मुंबई ब्रांच में उपलब्ध है. लेकिन बैंक ने अभी तक ये जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. भारद्वाज ने बैंक के उस दावे की भी आलोचना की कि 22 हजार से अधिक की धनराशि वाले बॉन्ड के खरीदार और रिडीमर की जानकारी का मिलान करने में चार महीने का समय लगेगा. बैंक के इस दावे को अंजलि ने हास्यास्पद बताया है.
'इलेक्टोरल बॉन्ड का ब्योरा मुहैया कराने में जानबूझकर की जा रही देरी'
कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी चुनाव आयोग को सौंपने में देरी की आलोचना की. सिंघवी ने सरकार और एसबीआई पर आरोप लगाया कि वे इस जानकारी को जानबूझकर छिपाने का प्रयास कर रहे हैं. सिंघवी का कहना है कि इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है. उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने के महत्व पर जोर दिया.
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वकील मनीष तिवारी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर इस मामले में एसबीआई की टालमटोली रोकने की बात की. तिवारी ने पारदर्शिता बरतने पर जोर देते हुए कहा कि वोटर्स को पता होना चाहिए किए किन-किन पार्टियों को चंदा मिला है.

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