
इमरान हाशमी ने 'हक' में अपने किरदार पर तोड़ी चुप्पी, बोले- आत्मा पर भारी...
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इमरान हाशमी और यामी गौतम की फिल्म 'हक' अब नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है. इमरान ने इस चुनौतीपूर्ण रोल को निभाने के बारे में बात की. इसके अलावा उन्होंने यामी गौतम पर भी रिएक्शन दिया है.
इमरान हाशमी और यामी गौतम की क्रिटिकली अक्लेम्ड फिल्म 'हक' अब थिएटर में चलने के बाद नेटफ्लिक्स पर प्रीमियर हो गई है. इसकी OTT रिलीज के मौके पर मोहम्मद अब्बास खान के मुश्किल किरदार को निभाने के बारे में इमरान हाशमी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है.
एक्टर ने Zoom को दिए इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने इस डार्क किरदार को कैसे निभाया? इसकी इमोशनल गहराई को कैसे समझा, और खुद को एक ऐसी परफॉर्मेंस देने के लिए प्रेरित किया जो पावरफुल और यादगार दोनों हो. उन्होंने फिल्म की तारीफ करते हुए कहा, 'हक आपके साथ रहती है क्योंकि यह समाज की असली दरारों को दिखाती है.'
हक को लेकर क्या बोले इमरान हाशमी? जब एक्टर से पूछा गया कि उन्होंने स्क्रिप्ट के लिए हां क्यों कहा? इस पर इमरान ने कहा, 'मुझे जो बात दिलचस्प लगी, वह यह थी कि हक में मेरे किरदार को साफ तौर पर सही या गलत के रूप में नहीं दिखाया गया है, वह विश्वास, हक, असुरक्षा और कंट्रोल बनाए रखने की जरूरत से बना है. स्क्रिप्ट दर्शकों को यह समझने का मौका देती है कि वह कहां से आ रहा है, बिना उसके कामों को सही ठहराए. यह बैलेंस लिखना मुश्किल है और निभाना तो और भी मुश्किल. मैंने हां इसलिए कहा क्योंकि हक आपको असल जिंदगी के झगड़ों को ठीक वैसे ही दिखाता है जैसे वे होते हैं.'
यामी गौतम के होने से परफॉर्मेंस पर कैसे असर पड़ा? इमरान हाशमी ने यामी गौतम की तारीफ करते हुए कहा, 'यामी सीन्स को बहुत क्लैरिटी के साथ करती हैं. वह इमोशन को ओवरप्ले नहीं करतीं, जो हक जैसी फिल्म के लिए बहुत जरूरी है. हमारे कई सीन उन बातों पर निर्भर करते हैं जो कही नहीं जातीं, जैसे नजरें, पॉज, एक कमरे में पावर का असंतुलन. उनकी शांति बिना डायलॉग के टेंशन पैदा करती है, जो आपको, एक को-एक्टर के तौर पर, रिएक्ट करने के लिए मजबूर करती है. यह डायनामिक कॉन्फ्लिक्ट को और बेहतर बनाता है क्योंकि यह असली लगता है.
हक आपके लिए क्या मायने रखती है? एक्टर ने कहा, 'हक इरादे को दिखाती है. यह उस तरह की फिल्म है जो आपको याद दिलाती है कि आपने सबसे पहले एक्टर बनने का फैसला क्यों किया था, ऐसी कहानियों से जुड़ने के लिए जो जवाब देने के बजाय सवाल पूछती हैं. इस स्टेज पर, मुझे इस बात में ज्यादा दिलचस्पी है कि एक कहानी क्या असर छोड़ती है. हक आपके साथ रहती है क्योंकि यह समाज में असली दरारों को दिखाती है, और उस बातचीत का हिस्सा बनना सार्थक लगता है.
हक में आपका रोल कहां फिट बैठता है? इमरान हाशमी ने कहा, 'यह रोल शांत लगता है लेकिन आत्मा पर भारी है. हक में टकराव गुस्से या आक्रामकता से बाहर नहीं आता, इसका ज्यादातर हिस्सा अंदरूनी, वैचारिक और पर्सनल है. मेरा किरदार मानता है कि वह जो भी फैसले लेता है, खासकर कानूनी दायरे में, वे सही हैं. यहां तक कि नैतिक भी हैं. इस तरह का विश्वास खतरनाक होता है क्योंकि इसे रखने वाले व्यक्ति को यह विलेन जैसा नहीं लगता. अपने करियर के इस मोड़ पर मैं ऐसे किरदारों की तरफ आकर्षित होता हूं जो अपने डार्क साइड को खुलकर नहीं दिखाते बल्कि स्क्रीन पर धीरे-धीरे दिखाते हैं.













