
इमरान ने अमेरिका के आगे टेके घुटने, पाकिस्तानियों ने ही खोली पोल
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पाकिस्तान, अमेरिका से अपने द्विपक्षीय रिश्तों को पटरी पर लाने के प्रयास में है. इस दिशा में आगे बढ़ते हुए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान आतंकियों से निपटने के लिए अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत दी है. हालांकि पाकिस्तान सार्वजनिक रूप से इससे इनकार किया है.
पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिकी दबाव के आगे झुक गया है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान आतंकियों से निपटने के लिए अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है. जबकि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने संसद को आश्वासन दिया था कि पाकिस्तान अमेरिका को अफगानिस्तान में ड्रोन ऑपरेशंस के लिए अपना कोई सैन्य अड्डा या एयरबेस नहीं दे रहा है. (फाइल फोटो-Getty Images) पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि 20 साल पुरानी व्यवस्था को बहाल करते हुए पाकिस्तान ने अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की इजाजत दे दी है. दक्षिणी अफगान प्रांत हेलमंद में तालिबान बलों पर बमबारी करने के लिए अमेरिकी एयरफोर्स द्वारा पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करते देखा गया. पत्रकारों का दावा है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के आसमान पर अमेरिकी सैन्य हवाई अभियान फिर से शुरू हुआ है. अमेरिका ने शम्सी एयरबेस के इस्तेमाल को लेकर पाकिस्तान से अनुरोध किया था. यह एयरबेस ग्वादर के चीनी संचालित अरब सागर बंदरगाह से 400 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है. (फाइल फोटो-रॉयटर्स)
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.







