
इटली में पानी के नीचे मिला ऐसा प्राचीन मंदिर, देखकर हो जाएंगे दंग
AajTak
इटली में पुरातत्वविदों ने पानी के नीचे से एक प्राचीन मंदिर खोज निकाला है. यह प्राचीन मंदिर नबातियन सभ्यता का बताया जा रहा है. इसके साथ ही दो विशेष रोमन मार्बल की भी खोज की गई है.
साउथ इटली के कंपानियां के पास पॉज्जुओली बंदरगाह पर पुरातत्वविदों को खोज के दौरान पानी के नीचे एक प्राचीन मंदिर के अवशेष मिले हैं. प्राचीन मंदिर के अवशेषों को देखकर हर कोई दंग है. यह अवशेष नबातियन सभ्यता से जुड़े मंदिर के बताए जा रहे हैं, जो नबातियन देवता दसहरा को समर्पित है. नबातियन सभ्यता में दसहरा को पहाड़ों का देवता भी कहा जाता है. मंदिर के अवशेषों के साथ खोजकर्ताओं को दो प्राचीन रोमन मार्बल भी मिले हैं, जो दिखने में बेहद खूबसूरत हैं.
मालूम हो कि नबातियन, रोमन साम्राज्य का मित्र साम्राज्य था. रोमन काल में नबातियन साम्राज्य फरात नदी से रेड सी तक फैला हुआ था. अरेबियन पैनिनसुला के रेगिस्तानी इलाके में स्थित पेट्रा उस समय नबातियन साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था. नबातियन साम्राज्य पॉज्जुओली बंदरगाह तक भी फैला हुआ था, जो रोमन मेडिटेरेनियन का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट भी हुआ करता था.
18वीं सदी के मध्य में प्राचीन पॉज्जुओली के हिस्से में नबातियन देवता दसहरा से जुड़ी एक खोज ने साफ कर दिया था कि यहां कभी नबातियन साम्राज्य हुआ करता था. क्योंकि प्राचीन समय में सिर्फ नबातियन समुदाय के लोग ही इस देवता की पूजा करते थे.
आगे खोज जारी
मंदिर के अवशेषों के मिलने के बाद अब आगे की खोज भी जारी कर दी गई है. मंदिर को लेकर और ज्यादा जानकारी जुटाई जा रही है, जो इटली के इस प्राचीन शहर के इतिहास के और भी कुछ पर्दे खोल सकती है.
इटली के सांस्कृतिक मंत्री ने खोज को लेकर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि प्राचीन पॉज्जुओली से एक और खजाना मिला है, जो यहां के सांस्कृतिक, धार्मिक और कमर्शियल महत्व को दर्शाता है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.








