
इजरायल-हमास युद्ध में हिज्बुल्लाह 'दीवाना'! अब पड़ रहा है मार खाना...
AajTak
Israel Hezbollah conflict: 1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति ने शिया बहुल लेबनान में उथल-पुथल मचा दी. इस क्रांति से कट्टरपंथी युवाओं का एक वर्ग बहुत प्रभावित हुआ. इस समूह ने अमेरिका और इजरायल को दुश्मन समझना शुरू कर दिया. इस ग्रुप को ईरान ने आर्थिक और सैन्य रूप से समर्थन दिया. ईरान और हिज्बुल्लाह दोनों ही अमेरिकी और इजरायली दादागीरी के खिलाफ लड़ रहे थे.
ये जंग तो इजरायल-हमास के बीच तो शुरू हुई थी. लेकिन अब जब जंग के एक साल पूरे होने को हैं तो सबसे घातक प्रहार लेबनान का लड़ाका संगठन हिज्बुल्लाह झेल रहा है. इजरायल ने पिछले 10 दिनों में युद्ध का तापमान बढ़ा दिया है और इजरायल के तेवर हिज्बुल्लाह लड़ाकों पर भारी पड़ रहा है. हिज्बुल्लाह के साथ संघर्ष की गंभीरता की ओर इशारा करते हुए इजरायल के रक्षा मंत्री यॉव गैलेंट ने पिछले सप्ताह कहा था कि अब ग्रेविटी का केंद्र उत्तर की ओर बढ़ रहा है और इजरायल इसी तरफ अपने फोर्सेज, रिसोर्सेज और ऊर्जा को ले जा रहा है. लेबनान में हिज्बुल्लाह के लड़ाकों के खिलाफ शुरू किए गए इजरायल के ऑपरेशन नॉदर्न एरोज में अब तक 585 लेबनानियों की मौत हो चुकी है.
सवाल है कि ये लड़ाई तो लड़ाई इजरायल-हमास की थी. फिर इसमें हिज्बुल्लाह ने कैसे एंट्री ले ली? दरअसल इजरायल और हिज्बुल्लाह पुराने दुश्मन रहे हैं.
इतिहास में छिपे दुश्मनी के बीज
1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति ने शिया बहुल लेबनान में उथल-पुथल मचा दी. इस क्रांति से यहां का युवा वर्ग प्रभावित हुआ. कट्टरपंथियों के एक समूह ने इस क्रांति के बाद अमेरिका और इजरायल को दुश्मन समझना शुरू कर दिया. इस समूह को ईरान ने आर्थिक और सैन्य रूप से समर्थन दिया; दोनों एक समान विचारधारा और पश्चिम एशिया में शक्ति हासिल करने के लक्ष्य से जुड़े हुए थे.
ईरान और हिज्बुल्लाह दोनों के लिए ही यहूदी इजरायल साझा शत्रु था. इसके अलावा ईरान और हिज्बुल्लाह दोनों ही इजरायल के मददगार अमेरिका से दुश्मनी करते थे.
पश्चिम एशिया में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे इजरायल की सेना ने 1982 में लेबनान पर आक्रमण किया था. इजरायल का आरोप था कि लेबनान में फिलीस्तीन लिब्रेशन ऑर्गनाइजेशन के कार्यक्रम सक्रिय थे. इसी इजरायली आक्रमण का विरोध करने के लिए हिज्बुल्लाह का अस्तित्व में आया.

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हाल में एक संघीय अधिकारी की गोली से नर्स एलेक्स जेफ्री प्रेटी की मौत हो गई थी. जिसके बाद से अमेरिका में पुलिस और फेडरल एजेंसियों की कार्रवाई, विरोध-प्रदर्शनों में जाने वालों और आम नागरिकों की जान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इस बीच वॉशिंगटन में प्रेटी की याद में लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. देखें अमेरिका से जुड़ी 10 बड़ी खबरें.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

इस वीडियो में जानिए कि दुनिया में अमेरिकी डॉलर को लेकर कौन सा नया आर्थिक परिवर्तन होने वाला है और इसका आपके सोने-चांदी के निवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा. डॉलर की स्थिति में बदलाव ने वैश्विक बाजारों को हमेशा प्रभावित किया है और इससे निवेशकों की आर्थिक समझ पर भी असर पड़ता है. इस खास रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताया गया है कि इस नए भूचाल के कारण सोने और चांदी के दामों में क्या संभावित बदलाव आ सकते हैं तथा इससे आपके निवेश को कैसे लाभ या हानि हो सकती है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिटेन के पीएम की मेजबानी करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून तभी सच में असरदार हो सकता है जब सभी देश इसका पालन करें. राष्ट्रपति शी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर बड़े देश ऐसा करेंगे नहीं तो दुनिया में जंगल का कानून चलेगा. विश्व व्यवस्था जंगल राज में चली जाएगी.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.








