
आर्टिकल 370 हटाने के तीन साल बाद जम्मू-कश्मीर में अब क्या करने जा रही है मोदी सरकार?
AajTak
जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है. मॉनसून सत्र में सरकार जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2023 पेश कर सकती है. बिल में कश्मीरी पंडितों और पीओके से विस्थापित लोगों के लिए विधानसभा में सीट रिजर्व रखने का प्रावधान है.
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के तीन साल बाद सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. मोदी सरकार संसद में एक नया बिल लाने जा रही है, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर में तीन विधानसभा सीटें आरक्षित हो जाएंगी.
दरअसल, केंद्र सरकार मौजूदा संसद सत्र में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2023 लाने जा रही है. बिल में प्रावधान किया गया है कि विधानसभा की एक सीट विस्थापित नागरिक और दो सीट कश्मीरी पंडितों के लिए आरक्षित होंगी.
विस्थापित नागरिक पीओके से आए जम्मू-कश्मीर नागरिकों को माना जाएगा. यानी, 1947 के समय जम्मू-कश्मीर के नागरिक थे, लेकिन पाकिस्तान के कश्मीर पर अवैध कब्जे के बाद वहां से लौटकर यहां आ बसे.
इसी तरह जो दो सीटें कश्मीरी पंडितों के लिए रिजर्व होंगी, उनमें से एक सीट महिला के लिए आरक्षित होगी. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल की ओर से इन तीनों सीटों पर प्रतिनिधि मनोनीत किए जाएंगे.
ऐसा क्यों?
- 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को खास दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया था. साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था.

अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस,इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है. मेन टारगेट न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नंटाज, इस्फाहान), IRGC कमांडर्स, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज और स्ट्रैटेजिक बेस हैं. ट्रंप ने प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर धमकी दी है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. अरब देश युद्ध से डर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.

दक्षिण मुंबई के फोर्ट इलाके में पुलिसकर्मी बनकर एक केन्याई महिला से 66 लाख रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस ने ठाणे से 48 वर्षीय सुरेश रंगनाथ चव्हाण को गिरफ्तार किया है. उसका एक साथी अभी फरार है. 21 जनवरी को एम. जी. रोड पर आरोपी ने अपने साथी के साथ महिला की टैक्सी रोककर जांच के बहाने 66.45 लाख रुपये से भरे बैग जब्त किए और पुलिस स्टेशन चलने का कहकर फरार हो गया.







