
आजम, जुगेंद्र, सोलंकी... एक हफ्ते में जेल से बाहर आ गए सपा के ये 5 नेता, क्या अखिलेश को मिलेगी ताकत?
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उत्तर प्रदेश की सियासी फिजा क्या बदल रही है? यह सवाल इसीलिए उठ रहा है कि आजम खान के जेल से बाहर आते ही सपा नेताओं की रिहाई की झड़ी लग गई है. पिछले एक सप्ताह में सपा के आधा दर्जन नेता जेल से जमानत पर रिहा हुए हैं, क्या इससे अखिलेश यादव को सियासी ताकत मिल पाएगी?
उत्तर प्रदेश की सियासत में सितंबर माह का आख़िरी सप्ताह समाजवादी पार्टी के लिए नई उम्मीद लेकर आया है. योगी सरकार में एक के बाद एक सपा के कई दिग्गज नेताओं को अलग-अलग मामलों में जेल जाना पड़ा था. अदालत से अब उन्हें राहत मिलनी शुरू हो गई है, जिसके चलते कोई 23 महीने बाद तो कोई 34 महीने और कोई 39 दिन बाद जेल से रिहा हुए हैं.
पिछले दस दिनों में सपा के क़रीब आधा दर्जन बड़े नेताओं को अदालत से राहत मिली है, जिसके बाद वे जेल से बाहर आए हैं. सबसे पहले आज़म खान 23 महीने के बाद रिहा हुए, उसके बाद जुगेंद्र सिंह यादव और रामेश्वर यादव तो मंगलवार को इरफ़ान सोलंकी 34 महीने के बाद जेल से बाहर निकले हैं.
वहीं, मुख़्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी भी 39 दिन के बाद जेल से रिहा हुए हैं तो उनके बड़े भाई अब्बास अंसारी पहले ही ज़मानत पर बाहर हैं. विधानसभा चुनाव से पहले सपा नेताओं को जिस तरह से रिहाई मिल रही है, वह अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के लिए हौसला बढ़ाने वाला माना जा रहा है. अखिलेश इसे न्याय की जीत बता रहे हैं तो भाजपा का कहना है कि ये नेता ज़मानत पर बाहर आए हैं, अदालत ने बरी नहीं किया है.
आज़म खान 23 महीने बाद जेल से रिहा
उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का असर सबसे ज़्यादा सपा के राष्ट्रीय महासचिव और दिग्गज मुस्लिम चेहरा आज़म खान पर पड़ा. योगी सरकार में आज़म के ख़िलाफ़ क़ानूनी शिकंजा कसा कि एक के बाद एक क़रीब 104 मुक़दमे उन पर दर्ज हो गए, लेकिन एक-एक कर सभी मामलों में उन्हें ज़मानत मिल गई. आज़म खान 23 सितंबर को 23 महीने के बाद जेल से बाहर निकले हैं.
26 फ़रवरी 2020 को आज़म खान पहली बार रामपुर में गिरफ़्तार हुए थे, जिसके बाद उन्हें 27 महीने बाद ज़मानत पर रिहाई मिली थी. मई 2022 में ज़मानत पर वह बाहर आए थे, लेकिन 17 महीने बाद 18 अक्टूबर 2023 को उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ा था. अब 23 महीने बाद रिहा होकर बाहर आए हैं, उनके बाहर निकलने से सपा के हौसले बुलंद हुए हैं.

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