
'आग का गोला बने एयक्राफ्ट जंगल की ओर ले गए पायलट, आबादी पर गिरता तो मचता हाहाकार' , चश्मदीदों की आंखोंदेखी
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मध्य प्रदेश के मुरैना और राजस्थान के भरतपुर जिले की सीमा में क्रैश हुए फाइटर जेट्स पर अब प्रत्यक्षदर्शियों का बयान सामने आया है. उनका मानना है कि पायलट्स ने अपनी सूझबूझ से एयरक्राफ्ट को आबादी में गिरने से बचा लिया. नहीं तो बड़ी तादाद में जनहानि हो सकती थी.
मुरैना जिले के कैलारस में रहने वाले लोगों की धड़कनें उस समय तेज हो गईं, जब उन्होंने आसमान में तेज गति से उड़ते 2 एयरक्राफ्ट में आग लगी हुई देखी. जिन लोगों ने भी यह नाजारा देखा वह यह सोचकर घबरा गए कि कहीं 'आग का गोला' बने ये एयरक्राफ्ट आबादी वाले इलाके में न गिर जाएं. अगर ऐसा होता तो हाहाकार मच सकता था, बड़ी तादाद में जनहानि होने की संभावना थी. लेकिन फाइटर जेट के पायलट्स ने सूझबूझ का परिचय देते हुए विमान को आबादी से दूर जंगल में ले जाकर क्रैश कराया.
बता दें कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 और मिराज-2000 आपस में टकराने की वजह से शनिवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गए. एक विमान राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित पींगोरा गांव में गिरा तो वहीं दूसरा एयरक्राफ्ट मध्य प्रदेश के मुरैना के पहाड़गढ़ में स्थित जंगल में गिरा. हादसे के बाद अब प्रत्यक्षदर्शियों का बयान आया है. उन्होंने इस घटना का आंखोंदेखा हाल बताया है.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'जब आग लगी तो दोनों एयरक्राफ्ट मुरैना जिले के कैलारस कस्बे के ऊपर से गुजर रहे थे. अगर मलबा कस्बे में गिर जाता तो भारी तादाद में लोगों की जानें जा सकती थी. ग्रामीणों का मानना है कि पायलट ने लोगों की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी और एयरक्राफ्ट को आबादी से दूर पहाड़गढ़ में स्थित जंगल में ले जाकर गिराया.
दोनों एयरक्राफ्ट्स ने ग्वालियर एयरबेस से करीब सुबह 9:15 उड़ान भरी थी. 50 किमी तय करते ही उनका एटीसी से संपर्क टूट गया. विमान हवा में ही जल उठे. एक अयरक्राफ्ट मुरैना के पहाड़गढ़ स्थित जंगल में गिर गया. इस हादसे के पायलट खुद को बचाने में कामयाब रहे. मुरैना कलेक्टर अंकित अस्थाना ने बताया कि विमान के दोनों पायलटों को बचा लिया गया. दोनों को चोटिल अवस्था में अस्पताल में भर्ती करवाया गया.
वायुसेना का बयान

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