
असदुद्दीन ओवैसी का राष्ट्रवादी रूप देश के कथित लिबरल्स के लिए चुनौती है?
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Operation Sindoor के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय सेना के इस कदम का तहेदिल से स्वागत किया है. पहलगाम हमले के बाद ओवैसी लगातार पाकिस्तान पर हमलावर रहे हैं, जबकि कई लिबरल्स और कांग्रेस नेता पहलगाम हमले से जुड़ी अपनी टिप्पणियों के कारण विवाद में आए. मोदी सरकार के प्रबल आलोचक रहे ओवैसी का इस मामले में रुख बेहद संतुलित रहा है.
भारतीय राजनीति में असदुद्दीन ओवैसी एक दिलचस्प किरदार हैं. संघ परिवार उन्हें मुस्लिम लीग के अवशेष के रूप में देखता है और देश की तथकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां उन्हें बीजेपी की बी टीम कहकर संबोधित करती हैं. उनकी बातें इतनी खरी होती हैं कि उनके विरोधी भी उनको जरूर सुनते हैं. यही कारण हैं कि टीवी चैनलों के वो दुलारे हैं. कारण कि उनके नाम पर टीवी हो या यूट्यूब व्यूज मिलने पक्के होते हैं. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति का पहलगाम हमले के बाद नया अवतार दिखाई दिया है. मुस्लिम राष्ट्रवाद के वो पोस्टर बॉय बन कर देश में उभरे हैं. मुसलमानों के अधिकार के नाम पर आग उगलने वाले नेता की छवि से इतर नए ओवैसी अब एक धर्मनिरपेक्ष और प्राउड इंडियन मुस्लिम की भाषा बोल रहे हैं. ओवैसी का राष्ट्रवाद लिबरल्स के धर्मनिरपेक्ष और सांप्रदायिक सद्भाव के वैचारिक ढांचे को चुनौती देता है. यह लिबरल्स को अपने तर्कों को और अधिक मजबूत बनाने पर मजबूर कर सकता है, खासकर जब जनमत राष्ट्रवाद की ओर झुकता दिखाई दे. ओवैसी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना का स्वागत करते हुए लिखा है कि मैं हमारी रक्षा सेनाओं द्वारा पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर किए गए लक्षित हमलों का स्वागत करता हूं. पाकिस्तानी डीप स्टेट को ऐसी सख्त सीख दी जानी चाहिए कि फिर कभी दूसरा पहलगाम न हो. पाकिस्तान के आतंक ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए. जय हिन्द! #OperationSindoor
1-ओवैसी का घोर राष्ट्रवाद
उनकी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) का चुनावी अभियान मुस्लिम पहचान के मुद्दों पर केंद्रित रहा है, जिसके चलते उन्हें मुख्यधारा की राष्ट्रीय पार्टियों के बीच जगह नहीं मिलती रही है. वह न केवल उदारवादियों बल्कि हिंदू दक्षिणपंथ के लिए भी एक समस्या रहे हैं. इस्लाम खतरे में है जैसे नारों , मुस्लिम जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों जैसे कि स्कूल की बच्चियों के हिजाब पहनने की ज़िद, मुस्लिम संस्थाओं में सुधार को नकारने में वो सबसे आगे रहे हैं. लेकिन अब उनकी राजनीति बदल गई है.
पहलगाम हमले के बाद उनके सार्वजनिक बयानों का मुख्य विषय यह रहा है कि सभी भारतीय, चाहे उनका धर्म या राजनीति कुछ भी हो, अपने मतभेदों को भूलकर पाकिस्तान और उसके आतंकी प्रतिनिधियों के खिलाफ एकजुट हो जाएं.
पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ज़रदारी द्वारा भारत को खून-खराबे की धमकी दिए जाने पर उनका जवाब वायरल हो गया. ओवैसी ने याद दिलाया कि बिलावल की मां बेनज़ीर भुट्टो की हत्या भी घरेलू आतंकवादियों ने की थी.उन्होंने कहा ,उन्हें पहले सोचना चाहिए कि उनकी मां की हत्या किसने की थी. उनकी मां की हत्या घरेलू आतंकवाद से हुई थी. अगर वो यह नहीं समझ सकते, तो कोई उनसे तर्क कैसे कर सकता है? अगर आतंकवाद ने उनकी मां की जान ली, तो हमारी माताओं और बेटियों की हत्या करने वाले भी आतंकवादी ही हैं. उन्हें यह समझना होगा.
ओवैसी पाकिस्तान को हर स्तर पर घेरते हैं. महाराष्ट्र के परभणी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए वे कहते हैं कि हमारी ज़मीन पर हमारे लोगों की हत्या कर के, और धर्म के आधार पर उन्हें निशाना बना कर, आप किस ‘दीन’ की बात कर रहे हैं?… आपने तो ISIS जैसी हरकत की है.

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