
अलग किचन से लेकर गेस्ट रूम तक- क्या हाई-प्रोफाइल कैदियों को जेल में मिल सकती हैं मनचाही सुविधाएं, क्या है नियम?
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कथित शराब घोटाले पर घिरे हुए हैं. ईडी ने उन्हें पूछताछ के बाद 15 अप्रैल तक के लिए तिहाड़ जेल भेज दिया. यहां उन्हें घर से खाने से लेकर टेबल-कुर्सी और बोतलबंद पानी दिया जा रहा है. वे हाई-प्रोफाइल कैदी हैं. क्या ऐसे कैदियों के लिए जेल में भी खास सुविधाएं होती हैं? क्या उनसे बाकियों की तरह काम करवाया जाता है?
सीएम अरविंद केजरीवाल फिलहाल तिहाड़ की जेल नंबर दो में रखे गए हैं. आने वाले दो सप्ताह तक वे यहीं रहेंगे, जिसके बाद कोर्ट तय करेगी कि आगे क्या करना है. इस दौरान केजरीवाल को कई सुविधाएं मिल रही हैं, जैसे उन्हें तीन किताबें मिली हैं. सेल के बाहर सुरक्षाकर्मियों के साथ क्विक एक्शन टीम तैनात है. एक डॉक्टर लगातार उनकी सेहत देख रहा है क्योंकि वे डायबिटिक हैं. उन्हें शुगरफ्री चाय और बिस्किट मिल रहे हैं. आम कैदियों को ये सुविधा नहीं मिलती.
क्या कहता है जेल का नियम
प्रिजन एक्ट 1894 कहता है कि जेल के अधिकारी किसी भी तरह से कैदियों के साथ बिजनेस नहीं कर सकते, न ही किसी तरीके से लेनदेन के जरिए कैदी को सीधी या इनडायरेक्ट सुविधा दे सकते हैं. कैदियों के बाहर चलते बिजनेस में भी कोई हिस्सेदारी जेल के लोग नहीं कर सकते. ये नियम इसलिए बना ताकि सभी कैदियों को समान ट्रीटमेंट मिल सके, न कि स्टेटस देखकर या किसी फायदे के लिए जेल अधिकारी किसी एक कैदी को खास मानने लगें.
सत्तर के दशक से सुनाई देने लगे मामले
जेल प्रशासन का कहना है कि वो सभी कैदियों या आरोपियों को एक जैसा ट्रीटमेंट देता है, VIP इससे अलग नहीं. हालांकि हाई प्रोफाइल लोगों को घर या होटल जैसी सुविधाएं मिलने की भी खबरें आती रहती हैं.
सबसे पहले ऐसी घटना सत्तर के आखिर में सुनाई दी, जब कांग्रेस लीडर संजय गांधी को एक फिल्म के ओरिजिनल प्रिंट जलाने के मामले में जेल हुई. मामला तीसहजारी कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां उन्हें एक महीने के लिए तिहाड़ भेजा गया था. इसके बाद से लगातार ऐसे मामले सुनाई देते रहे, जब खास लोगों को कैद के दौरान भी शानदार सुविधाएं मिलीं.

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