अमेरिका में भारतीय मूल की प्रोफेसर के साथ नस्लीय भेदभाव, महिला ने कॉलेज के खिलाफ दर्ज कराया केस
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27 फरवरी को बोस्टन ग्लोबर अखबार में की रिपोर्ट में कहा गया है कि बाबसन कॉलेज में एंटरप्रेन्योरशिप की एसोसिएट प्रोफेसर लक्ष्मी बालाचंद्र ने आरोप लगाया है कि उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के चलते उनकी नौकरी चली गई और इसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी हुई है.
अमेरिका के मैसाचुसेट्स में पढ़ाने वाली भारतीय मूल की एक एसोसिएट प्रोफेसर ने केस दर्ज कराया है. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया है कि उनके साथ नस्ली और लैंगिक भेदभाव किया गया है. दरअसल, 27 फरवरी को बोस्टन ग्लोबर अखबार में की रिपोर्ट में कहा गया है कि बाबसन कॉलेज में एंटरप्रेन्योरशिप की एसोसिएट प्रोफेसर लक्ष्मी बालाचंद्र ने आरोप लगाया है कि उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के चलते उनकी नौकरी चली गई और इसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी हुई है.
प्रोफेसर द्वारा दायर केस में उन्होंने कॉलेज के एक प्रोफेसर और एंटरप्रेन्योरिशिप डिविजन के पूर्व अध्यक्ष एंड्रयू कॉर्बेट पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें इसके लिए सीधे तौर पर आरोपी बताया है.
बोस्टन की एक कोर्ट में 27 फरवरी को दायर की गई शिकायत के अनुसार, बालाचंद्र ने आरोप लगाया कि कॉर्बेट, जो शिक्षण असाइनमेंट, क्लास शेड्यूलिंग और वार्षिक समीक्षा की देखरेख करते थे, ने उन्हें एंटरप्रेन्योरिशिप ही पढ़ाने की अनुमति दी थी, जबकि उन्होंने उनसे अनुरोध किया था कि वह अन्य क्लासीस भी ले सकती हैं, जैसा कि वह पहले एमआईटी स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पढ़ा चुकी हैं.
बालचंद्र की शिकायत में आरोप लगाया गया है, "बाबसन में श्वेत और पुरुष शिक्षकों का पक्ष लिया जाता है और मुख्य रूप ऐसे शिक्षकों के लिए पुरस्कार और विशेषाधिकार रिजर्व किए जाते हैं."
शिकायत के अनुसार, उनके रिसर्च रिकॉर्ड, रुचि व्यक्त करने और कॉलेज में सर्विस देने के बावजूद उन्हें कई नेतृत्व पदों और अनुसंधान करने और लिखने के लिए अधिक समय देने के अवसरों से वंचित किया गया. इस तरह के विशेषाधिकार नियमित रूप से एंटरप्रिनियोरपशिप डिविज में श्वेत पुरुष शिक्षकों को दिए जाते हैं."
बालचंद्र की वकील मोनिका शाह ने बताया कि प्रोफेसर ने मैसाचुसेट्स कमीशन अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन में भेदभाव का आरोप भी दायर किया है.

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