
अमेरिका के ये 6 राज्य अवैध प्रवासियों के लिए सबसे सुरक्षित, क्यों वॉशिंगटन भी नहीं दे पाता दखल?
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डोनाल्ड ट्रंप अवैध प्रवासियों पर लगातार सख्त हैं. इस बीच एक नई चीज हुई. कहीं-कहीं खुद अमेरिकी आबादी राष्ट्रपति के खिलाफ दिखने लगी. लोग चाहते हैं कि घुसपैठियों के साथ मानवीय व्यवहार हो. यूएस के कई राज्य ऐसे हैं, जो अवैध रूप से आने वालों के लिए शरणगाह बन चुके. कैलिफोर्निया इसमें अव्वल है, जो उनके हक में कानून तक बना चुका.
प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, दो साल पहले अमेरिका में लगभग डेढ़ करोड़ अवैध प्रवासी थे. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप सरकार मानती कि घुसपैठियों की आबादी इससे कहीं ज्यादा है. ट्रंप प्रशासन उनकी छंटनी करने और निकाल-बाहर करने में जुटा है. दूसरी तरफ कई राज्य इसके खिलाफ हैं. वे अवैध प्रवासियों का कागजी पक्ष नहीं ले रहे, बल्कि सड़कों पर आकर उनके लिए प्रदर्शन तक कर रहे हैं. इन राज्यों को बाहरियों से क्या फायदा है, जो वे इसके लिए सेंटर से भिड़ने लगे?
अनुमानतः कितने अवैध प्रवासी
अवैध प्रवासियों की संख्या को लेकर अलग-अलग संस्थाएं अलग डेटा देती रहीं, लेकिन इतना तय है कि अमेरिका दशकों से तमाम देशों, खासकर युद्ध-आपदा-गरीबी झेलते देशों के लोगों का ड्रीम डेस्टिनेशन रहा. वैध संभव न हो तो लोग अवैध तरीके से यूएस पहुंचने लगे. घुसपैठ के रास्ते जोखिमभरे हैं लेकिन तब भी ड्रीम अमेरिका धुंधला नहीं रहा. पहुंचने के बाद भी कोई ठिकाना नहीं. अवैध प्रवासी होने की वजह से लोगों को पक्का काम नहीं मिल सकता, न ही वे हेल्थ से जुड़ी सुविधाएं ले सकते हैं. इसके बाद भी चाव नहीं घटा.
पहले कार्यकाल से ही ट्रंप मास डिपोर्टेशन की बात करते रहे. अब उनकी आक्रामकता और बढ़ी है. वाइट हाउस पहुंचने के बाद से तेजी से डिपोर्टेशन हो रहा है. हाल में ट्रंप प्रशासन ने दावा किया कि 2 मिलियन अवैध प्रवासी या तो बाहर निकाल दिए गए या स्वेच्छा से देश छोड़ चुके. टारगेट बड़ा है. इसे पूरा करने के लिए सरकार और सख्त हो रही है. इसी बीच तस्वीर में ऐसे राज्य आए, जहां सबसे ज्यादा अवैध प्रवासी रह रहे हैं.
क्या कहती हैं संस्थाएं
प्यू रिसर्च सेंटर ने इसी साल एक रिपोर्ट निकाली. ये कहती है कि कैलिफोर्निया अवैध प्रवासियों का गढ़ है. इसके बाद टेक्सास, फ्लोरिडा, न्यू यॉर्क, न्यू जर्सी और इलिनॉइस का नंबर आता है. ये 6 राज्य ऐसे हैं, जहां घुसपैठिए आराम से रह पाते हैं.

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

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डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

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