
अमेरिका-इजरायल में बढ़ी दोस्ती, मुस्लिम देशों को झटका
AajTak
नेफ्टाली बेनेट के नेत्तृव वाली इजरायल की नई सरकार अमेरिका के साथ टकराव के मसलों को दरकिनार कर आगे बढ़ना चाहती है. पदभार संभालने के बाद पहली बार इजरायल के नए विदेश मंत्री यैर लैपिड ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन से रोम में मुलाकात की. इस दौरान यैर लैपिड ने ईरान को लेकर अमेरिकी कूटनीति पर चिंता जाहिर की. लेकिन यह भी कहा कि उन्होंने अपनी इस पहली उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान अमेरिका से टकराव वाला रुख नहीं अपनाया.
नेफ्टाली बेनेट के नेत्तृव वाली इजरायल की नई सरकार अमेरिका के साथ टकराव के मसलों को दरकिनार कर आगे बढ़ना चाहती है. पदभार संभालने के बाद पहली बार इजरायल के नए विदेश मंत्री यैर लैपिड ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन से रोम में मुलाकात की. इस दौरान यैर लैपिड ने ईरान को लेकर अमेरिकी कूटनीति पर चिंता जाहिर की. लेकिन यह भी कहा कि उन्होंने अपनी इस पहली उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान अमेरिका से टकराव वाला रुख नहीं अपनाया. लैपिड के बयान से जाहिर है कि इजरायल बेंजामिन नेतन्याहू की पूर्व की सरकार के उलट अमेरिका से शांतपूर्ण माहौल में बातचीत करना चाहता है. इससे पहले बेंजामिन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कहा था कि उन्हें भले ही कुर्बानी देनी पड़े लेकिन वह ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते के खिलाफ रहेंगे. फिलहाल, अमेरिकी विदेश मंत्री ने इजरायल की नई सरकार के रुख की सराहना की और संबंधों को मजबूत बनाने की बात कही है. ब्लिंकन और लैपिड के बयान को उन मुस्लिम देशों के लिए झटका माना जा रहा है जिन्होंने फिलिस्तीन पर हमले को लेकर इजरायल को घेरने की कोशिश की है. हालांकि ईरान को लेकर इजरायली विदेश मंत्री के बयान पर अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. (फोटो-@SecBlinken) इजरायल के विदेश मंत्री यैर लैपिड रोम में हैं जहां उन्होंने रविवार को अपने अमेरिकी समकक्ष से मुलाकात की. लैपिड ने कहा कि इजरायल और अमेरिका की नई सरकारों के पास अपने रिश्तों को नए सिरे से शुरू करने का मौका है. लेकिन उन्होंने ईरान परमाणु समझौते में फिर से शामिल होने के राष्ट्रपति जो बाइडेन की मंशा को लेकर अपनी चिंताओं को भी जाहिर किया. (फोटो-@yairlapid)
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलीबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका-ईरान वार्ता का दावा फर्जी बताया. उनका कहना है कि यह वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने और अमेरिका-इजरायल की रणनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए फैलाया गया. ईरान ने किसी भी वार्ता की पुष्टि से इनकार किया.

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.









