
अब तक 35... रूस-यूक्रेन जंग में भारतीयों की तस्करी कर रहा ये 'सिंडिकेट', CBI ने शुरू किया ताबड़तोड़ एक्शन
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रूस-यूक्रेन की जंग में भारतीयों की मौत की खबरें आ रही हैं. अब तक देश के दो युवा जंग में अपनी जान गंवा चुके हैं. दोनों के परिवार का दावा है कि उन्हें धोखे से रूसी सेना में शामिल करा दिया गया और जंग के मैदान में उनकी जान चली गई.
मोटी सैलरी और चमचमाती लाइफस्टाइल वाली नौकरी... ये लालच देकर धोखे से भारतीयों को रूस-यूक्रेन की जानलेवा जंग में शामिल कराया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ज्यादातर मामलों में रूस पहुंचने से पहले लोगों को यह नहीं बताया जाता कि उन्हें रूस-यूक्रेन जंग में भेजा जाएगा. रूस पहुंचने के बाद उनसे एक कॉन्ट्रेक्ट साइन कराया जाता है, जो की रूसी भाषा में होता है. कॉन्ट्रेक्ट में लिखा होता है कि वह रूसी सेना के साथ हेल्पर के तौर पर काम करेंगे, जिनसके बदले उन्हें हर महीने 2 लाख रुपए मिलेंगे.
यह गिरोह पर अब CBI की नजर में आ गया है. इसलिए धरपकड़ के लिए 7 मार्च को जांच एजेंसी ने दिल्ली, तिरुवनंतपुरम, मुंबई, अंबाला, चंडीगढ़, मदुरै और चेन्नई में 13 ठिकानों पर छापेमारी की. न्यूज एजेंसी के मुताबिक अब तक ऐसे 35 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें सोशल मीडिया चैनलों, परिचितों और एजेंटों के माध्यम से मोटी सैलरी वाली नौकरियों के झूठे वादे कर युवाओं को रूस ले जाया गया.
अब तक दो भारतीयों की मौत
दरअसल, रूस-यूक्रेन जंग में अब तक दो भारतीयों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं. इनमें से एक गुजरात के सूरत तो वहीं दूसरा तेलंगाना के हैदराबाद का रहने वाला था. आइए पहले जान लेते हैं कि आखिर ये दोनों रूस की तरफ से जंग लड़ने के लिए पहुंचे कैसे और किन परिस्थितियों में इनकी मौत हो गई.
रूसी सेना में बनाए गए थे हेल्पर
पहला केस सूरत के हेमिल अश्विन भाई मंगूकिया का है. इनकी जंग लड़ते हुए मौत हो गई थी. हेमिल रूस के लिए लड़ रहे थे. दावा है कि उनकी मौत यूक्रेन के एक मिसाइल अटैक में हुई. 23 साल के हेमिल रूस की सेना से बतौर 'हेल्पर' जुड़े थे. वहां उन्होंने 50 हजार रुपये महीने की सैलरी पर रखा गया था. हेमिल ने आखिरी बार 20 फरवरी को अपने परिवार से बात की थी.

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