
अफ्रीका से लाए जा रहे कुछ चीतों को भारत ने लेने से किया इनकार, कहा- ये तो अब शिकार ही नहीं कर सकते
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नवंबर में दक्षिण अफ्रीका से 10 अफ्रीकी चीते भारत लाने पर सहमति बन गई है. इनमें 5 नर एवं 5 मादा होंगे. दक्षिण अफ्रीका के चीतों के विशेषज्ञ विन्सेंट वैन डेर मेरवे 26 अप्रैल को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ आए थे. इसके बाद एनटीसीए की टीम ने भी कूनो का भ्रमण किया था. प्रोजेक्ट चीता के तहत अगले पांच वर्षों में करीब 35 से 40 चीतों को देश में लाने की तैयारी है.
नामीबिया से आठ चीते भारत लाए जाने हैं, जिन्हें मध्यप्रदेश के श्योपुर के कूनो-पालपुर नेशनल पार्क में रखा जाएगा. हालांकि भारत ने कुछ चीतों को लेने से मना कर दिया है. जानकारी के मुताबिक उन्हें भारत में लाने के लिए नामीबिया में पकड़ लिया गया था लेकिन बाद में उन्हें इसलिए छोड़ दिया गया क्योंकि वे अब शिकार करने लायक नहीं रह गए थे. उन्हें सिर्फ कैद करके ही रखा जा सकता है. तेंदुओं से भरे जंगल में इस तरह के चीतों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. यानी चीतों के भारत में पहुंचने में अभी और वक्त लगेगा.
भारतीय वन्यजीव संस्थान के डीन डॉ. यादवेंद्रदेव विक्रमसिंह झाला और एक विशेषज्ञ ने नामीबिया की अपनी हालिया यात्रा के दौरान पाया कि आठ में से तीन चीते जंगली जानवरों को शिकार करने में सक्षम नहीं हैं. अब उनकी जगह दूसरे चीतों को लाया जाएगा.
एक महीने क्वारंटीन किए जाएंगे चीते
अभ्यारण के एक अधिकारी ने बताया कि अब दूसरे चीतों को नामीबिया में एक महीने तक क्वारंटीन किया जाएगा. इसके बाद कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एंडेंजर्ड स्पीशीज ऑफ वाइल्ड फौना एंड फ्लोरा (CITES) की अनुमति मिलने के बाद उन्हें भारत लाया जाएगा.
उन्होंने कहा कि इन चीतों को लाने के लिए बहुत की सावधानी बरती जा रही है. वहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि चीतों को लाने की प्रक्रिया में कहीं कोई रुकावट नहीं है. CITES संकटग्रस्त प्रजातियों की तस्करी को रोकता है.
एमपी के वन मंत्री विजय शाह ने TOI को बताया कि सरकार किसी भी तरह नवंबर के पहले सप्ताह तक चीतों को कूनो-पालपुर नेशनल पार्क लाने की कोशिश कर रही है. हालांकि दक्षिण अफ्रीका के साथ समझौता अभी लंबित है.

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