
' अफसोस होता है, ये वो कांग्रेस नहीं...', शिवसेना में क्यों शामिल हुए मिलिंद देवड़ा, चिट्ठी लिखकर बताई वजह
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देवड़ा ने निराशा जताते हुए कहा कि, 'अफसोस की बात है कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति अब उस पार्टी से मेल नहीं खाती है जिसमें मेरे पिता मुरलीभाई और मैं क्रमशः 1968 और 2004 में शामिल हुए थे. यह अपनी वैचारिक और संगठनात्मक जड़ों से भटक गयी है, इसमें ईमानदारी और रचनात्मक आलोचना की सराहना का अभाव है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा रविवार को शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं. वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए हैं. इस दौरान शिंदे ने उन्हें भगवा झडा भी भेंट किया. मिलिंद देवड़ा ने शिवसेना में शामिल होने के बाद कहा कि यह मेरे लिए बहुत भावुक दिन है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एकनाथ शिंदे जी के नेतृत्व में पार्टी में शामिल होने के लिए कांग्रेस के साथ अपने 55 सालों के साथ को छोड़ दूंगा. शिवसेना जॉइन करने के बाद मिलिंद देवड़ा ने एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने तफसील से अपने कांग्रेस छोड़ने के कारणों को बताया है.
मतदाताओं को संबोधित लिखी चिट्ठी देवड़ा ने सीधे तौर पर मतदाताओं को संबोधित करते हुए चिट्ठी लिखी है और उसे X पर पोस्ट किया है. इस चिट्ठी में देवड़ा ने कहा कि, '2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद, मैंने हमेशा बड़े सुधारों और जवाबदेही की बात की. 2019 के चुनाव में हमारी पार्टी की हार के लिए मैंने मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया, भले ही मुझे चुनाव से सिर्फ एक महीने पहले ही इस पद पर नियुक्त किया गया था. मेरा मानना था कि अगर मैं त्याग कर सकता हूं, तो मुझे इसे मांगने का भी अधिकार है.'
2019 में किया था UBT से गठबंधन का विरोध देवड़ा ने कहा कि, '2019 में महाराष्ट्र में MVA की स्थापना के दौरान, मैंने UBT के साथ गठबंधन का विरोध किया था, क्योंकि मुझे लगा कि इससे कांग्रेस पर विपरीत असर पड़ेगा. गठबंधन के बाद भी चार साल तक मैंने पार्टी को हमेशा सावधानी बरतने की सलाह दी. दरकिनार किए जाने के बावजूद, गांधी परिवार और पार्टी के साथ मेरे परिवार के स्थायी रिश्ते को बनाये रखने में मेरी प्रतिबद्धता दृढ़ रही. दस सालों तक, मैंने व्यक्तिगत पद या सत्ता की इच्छा किए बिना विभिन्न भूमिकाओं में पार्टी के लिए हर संभव प्रयास किये.'
कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर जताया अफसोस देवड़ा ने निराशा जताते हुए कहा कि, 'अफसोस की बात है कि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति अब उस पार्टी से मेल नहीं खाती है जिसमें मेरे पिता मुरलीभाई और मैं क्रमशः 1968 और 2004 में शामिल हुए थे. यह अपनी वैचारिक और संगठनात्मक जड़ों से भटक गयी है, इसमें ईमानदारी और रचनात्मक आलोचना की सराहना का अभाव है. वह पार्टी जिसने कभी भारत के आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की थी, अब वही पार्टी व्यावसायिक घरानों को राष्ट्र-विरोधी कहकर निशाना बनाती है. यह भारत की विविध संस्कृति और धर्मों का जश्न मनाने से भटक कर, जाति के आधार पर उत्तर-दक्षिण में विभाजन पैदा कर रही है. न केवल सत्ता हासिल करने में बल्कि केंद्र में रचनात्मक विपक्ष के रूप में प्रभावी ढंग से काम करने में भी असफल हो रही है.
'मुंबई, महाराष्ट्र और भारत के लिए सार्थक काम करने की इच्छा' 20 सालों के बाद भी, मेरी प्रबल इच्छा है कि मैं मुंबई, महाराष्ट्र और भारत के लिए सार्थक काम करूं. मुंबई मेरी कर्मभूमि है और भारत मेरी मातृभूमि . मुंबई के लोगों का कल्याण मेरे लिए राजनीतिक संबद्धताओं से परे है, जो मुझे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय की ओर ले जाता है. मेरा उद्देश्य है कि मैं अपने अनुभव, ज्ञान और काबिलियत का इस्तेमाल करके हर धर्म, जाति और आर्थिक स्थिति के लोगों की सेवा करूं, जैसा कि मैंने हमेशा अपने राजनीतिक जीवन में किया है.
पीएम मोदी और शिंदे के लिए कही ये बात देवड़ा ने यह भी कहा कि 'आज हम देख रहे हैं कि एक साधारण चाय बेचने वाला दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री है और एक ऑटोरिक्शा चालक देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री है. यह बदलाव भारत की राजनीति को और बेहतर बना रहा है, और हमारे समतावादी मूल्यों की पुष्टि करता है. एकनाथ शिंदे जी देश के सबसे मेहनती और सुलभ मुख्यमंत्रियों में से एक हैं. महाराष्ट्र के वंचित वर्गों के बारे में उनकी समझ और शासन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए किए जा रहे उनके प्रयास सराहनीय हैं.'

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