
अनु भाई की जीवनभर की तपस्या सफल, राम मंदिर निर्माण के लिए लाए गए पहले पत्थरों की खेप उन्होंने ही तराशी
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गुजरात के अनु भाई सोमपुरा की निगरानी में ही अयोध्या में पहली बार मंदिर निर्माण के लिए पत्थर आया था और पत्थरों को तराशने का काम शुरू हुआ था. वह अपने भाई और बड़े बेटे के साथ अयोध्या आए थे और फिर यहीं के होकर रह गए. तराशे गए पत्थर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है. मगर, अनु भाई सोमपुरा के लिए जीवन भर की तपस्या है.
अयोध्या में आखिरकार भगवान राम का मंदिर बनकर तैयार है. प्राण-प्रतिष्ठा की तारीख नजदीक आ रही है. लेकिन इस तारीख के लिए तमाम लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी खपा दी. उन्हीं लोगों में से एक हैं गुजरात के अनु भाई सोमपुरा, जिनकी निगरानी में ही अयोध्या में पहली बार मंदिर निर्माण के लिए पत्थर आया था और पत्थरों को तराशने का काम शुरू हुआ था.
अनु भाई सोमपुरा कहते हैं वह अपने भाई और बड़े बेटे के साथ अयोध्या आए थे. शुरुआत में पत्थर तराशने वाले कारीगरों से चलने को कहा, तो अयोध्या में अशांति के चलते उन लोगों ने आने से मना कर दिया था. मगर, अनु भाई अपने भाई और बेटे के साथ अयोध्या आए, तो यहीं के ही होकर रह गए.
राम मंदिर निर्माण के लिए मिर्जापुर, राजस्थान और जयपुर के कलाकारों की मदद से तराशे गए पत्थर लोगों की श्रद्धा का केंद्र है. मगर, अनु भाई सोमपुरा के लिए जीवन भर की तपस्या है. 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा करेंगे, तो उसकी नींव में 1990 में आए पत्थरों की वह पहली लॉट लगी होगी, जो अनु भाई के आंखों के सामने आई थी.
30 दिसंबर तक काम पूरा करने की मिली है डेडलाइन
इस समय अयोध्या में प्रभु श्री रामलला का गर्भ गृह स्थान लगभग तैयार हो गया है. लाइटिंग-फिटिंग का काम भी पूरा कर लिया गया है. श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय ने कुछ दिन पहले बताया था कि अभी के लिए भूतल और पहली मंजिल का काम पूरा करने के लिए 30 दिसंबर डेडलाइन फिक्स की गई है. इसी डेडलाइन में काम पूरा करना है. यानी 7 दिन में फिनिशिंग से लेकर बाकी सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे.
प्राण-प्रतिष्ठा के लिए मिलेगा महज 84 सेकंड का मुहूर्त

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