
अडानी के बाद अब OCCRP के निशाने पर Vedanta, जानिए क्या-क्या लगे हैं आरोप
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अपनी एक फ्रेश रिपोर्ट में OCCRP ने दावा किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान वेदांता प्रमुख पर्यावरण नियमों को कमजोर करने के लिए 'गुप्त' लॉबिंग अभियान के पीछे थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार ने बिना पब्लिक कंसल्टेशन के खनन से जुड़े बदलावों को मंजूरी दे दी.
आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट्स (OCCRP) की रिपोर्ट ने अडानी ग्रुप के बाद अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. अपनी एक फ्रेश रिपोर्ट में OCCRP ने दावा किया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान वेदांता ग्रुप प्रमुख पर्यावरण नियमों को कमजोर करने के लिए 'गुप्त' लॉबिंग के पीछे था. पब्लिश हुई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार ने बिना पब्लिक कंसल्टेशन के ही खनन से जुड़े बदलावों को मंजूरी दे दी. रिपोर्ट का दावा है कि एक्सपर्ट्स के अनुसार, बदलावों को अवैध तरीके से लागू किया गया था.
खनन उत्पादन को बढ़ाने के लिए पैरवी
OCCRP ने कहा कि जनवरी 2021 में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने पूर्व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से कहा था कि सरकार, खनन कंपनियों को नई पर्यावरणीय मंजूरी के बिना उत्पादन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति दे सकती है. इससे सरकार भारत की आर्थिक सुधार में 'गति' ला सकती है. जॉर्ज सोरोस समर्थित OCCRP ने दावा किया कि वेदांता के ऑयल बिजनेस केयर्न इंडिया ने भी सरकारी नीलामी में जीते गए ऑयल ब्लॉकों में खोजपूर्ण ड्रिलिंग के लिए सार्वजनिक सुनवाई को रद्द करने की सफलतापूर्वक पैरवी की थी.
विवाद वाले प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी
OCCRP की रिपोर्ट में कहा गया है कि तब से राजस्थान में केयर्स के छह विवाद वाले ऑयल प्रोजेक्ट्स को स्थानीय विरोध के बावजूद मंजूरी दे दी गई है. OCCRP ने दावा किया कि उसने इंफॉर्मेशन रिक्वेस्ट की स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर प्राप्त किए गए हजारों भारतीय सरकारी दस्तावेजों का विश्लेषण किया है. इन दस्तावेजों में इंटरनल ज्ञापनों और बंद दरवाजे में हुई मीटिंग के मिनट्स, यहां तक कि वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के पत्र भी रिकॉर्ड्स में शामिल हैं.
OCCRP ने रिपोर्ट में दावा किया है कि जनवरी 2021 में अनिल अग्रवाल ने तत्कालीन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को एक पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि सरकार खनन कंपनियों को नए पर्यावरण मंजूरी को सुरक्षित किए बिना उत्पादन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति देकर भारत की आर्थिक सुधार में 'गति' जोड़ सकती है.

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