
Explainer: कितना बड़ा संकट... सिर्फ होर्मुज से हुई LPG की दिक्कत, फिर पेट्रोल-डीजल पर असर क्यों नहीं? जानिए सबकुछ
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से LPG को लेकर ही दिक्कत क्यों हुई, पेट्रोल-डीजल पर इसका असर क्यों नहीं हुआ? इसके पीछे कई कारण हैं. इस खबर में हर एक फैक्टर को विस्तार से समझाया गया है.
मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के बीच भारत की LPG आपूर्ति चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है. गैस स्टेशनों पर सिलेंडर भरवाने के लिए लंबी कतारें लगी हैं. दर्जनों रेस्टोरेंट और ढाबे बंद हो गए हैं और घरों में लोग बुकिंग के लिए कई दिनों का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन यह स्थिति क्यों पैदा हुई, जिसका जवाब क्या सिर्फ 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना है?
जंग के कारण यह रास्ता बंद है. यहीं से ग्लोबल एनर्जी का 20 फीसदी हिस्सा होकर गुजरता है. यह जीवाश्म ईंधन का प्रमुख निर्यातक भी है. इस रास्ते से होते हुए एनर्जी भारी मात्रा में भारत आती है, LPG, LNG और क्रूड ऑयल भारत के लिए इस रास्ते से 50 फीसदी से ज्यादा आते रहे हैं. ऐसे में यह भी सवाल खड़ा होता है कि LPG पर ही क्यों इतना दबाव दिखाई दिया, जबकि पेट्रोल-डीजल पर इसका कोई असर नहीं हुआ, इसके दाम भी नहीं बढ़े और लोगों को आसानी से मिल भी जा रही हैं?
LPG को लेकर फैली दहशत एलपीजी गैस सिलेंडरों को लेकर 9 मार्च से शुरू हुई दहशत अब कई गुना बढ़ गई है. 12 मार्च से कुछ सीएनजी, डीजल और पेट्रोल स्टेशनों पर लगी लंबी कतारों में इस डर का असर साफ दिखाई दिया, हालांकि, ऐसे मामले बहुत कम थे. सरकार का कहना है कि पेट्रोलियम ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति है, जिसे रिफाइन करके पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है.
क्यों एलपीजी पर दिखा इतना दबाव? एलपीजी के मामले में भी सरकार ने दोहराया है कि घरेलू क्षेत्र में आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी. सड़कों पर फैली अफरा-तफरी, जिसमें लंबी कतारें, हाथापाई और सिलेंडर वितरण में देरी को लेकर केंद्र सरकार ने कहा कि यह अचानक बढ़ी डिमांड और पैनिक सिचुएशन के कारण है. सरकार ने स्थिति को कंट्रोल करने के लिए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दिया है और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री रोक दी गई है. इसके साथ ही, काला बाजार में एलपीजी रिफिल की बढ़ती कीमतों के कारण कई भोजनालय बंद हो गए हैं.
इसलिए जब फारस की खाड़ी में होर्मुज पर यातायात की गति तेज हुई, तो एलपीजी की आपूर्ति पर सबसे पहले इसका असर पड़ा. भारत के रसोई घरों ने पेट्रोल पंपों और निजी कारों से पहले इस तनाव को महसूस किया.
भारत में LPG की आपूर्ति पर होर्मुज का क्या प्रभाव? पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, भारत हर साल 31 मिलियन टन से ज्यादा LPG की खपत करता है. घरेलू उत्पादन इस मांग के आधे से भी कम की पूर्ति करता है. बाकी की पूर्ति सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आयात द्वारा की जाती है. इस कारण इस फ्यूल को ले जाने वाले टैंकरों को भारत पहुंचने से पहले होर्मुज से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन भारत की एलपीजी खेपों का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है. मीडिया में अनुमान लगाया गया है कि भारत जाने वाले एलपीजी कार्गो का लगभग 80-90% हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से होकर गुजरता है.













