
$130 पर पहुंचा कच्चा तेल... तो गंभीर संकट में आएगा भारत? जानें क्या होंगे नुकसान
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कच्चे तेल की कीमत अभी 101 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है. इस बीच, भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चेतावनी दी है.
ईरान और अमेरिका में जंग जारी है, जिस कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता कई देशों के लिए बंद है. यह वह रास्ता है, जहां से ग्लोबल एनर्जी (तेल-गैस) का 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. इस कारण एनर्जी सप्लाई में बांधा आई है, जिस कारण कच्चे तेल के दाम में आए दिन तेजी देखी जा रही है.
कच्चे तेल के दाम बढ़ने से दुनिया में महंगाई का खतरा बढ़ चुका है और ग्लोबल इकोनॉमी ग्रोथ में भी गिरावट आने की संभावन जताई जा रही है. इस बीच, मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि 90 डॉलर प्रति बैरल पर कच्चा तेल रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई खास असर नहीं हेागा, लेकिन अगर यह दो से तीन तिमाहियों तक 130 डॉलर प्रति बैरल तक चढ जाती है, तो GDP 1 फीसदी की कमी आ सकती है और महंगाई में तेजी देखी जा सकती है.
सीईए ने 2 मार्च को वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति के समक्ष इसकी जानकारी दी. वित्त मंत्रालय की समिति को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, जीडीपी से लेकर महंगाई बढ़ोतरी और राजकोषीय घाटा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.
भारत के विकास पर क्या होगा असर? रिपोर्ट में कहा गया कि अगर तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल पर भी दो से तीन तिमाहियों तक बनी रहती है, तो इसका आर्थिक प्रभाव काफी गंभीर होगा. CPI महंगाई दर बढ़कर 5.5% के करीब पहुंच जाएगी. वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.4% से घटकर 6.4% हो जाएगी. चालू खाता घाटा वर्तमान में 1.2% से बढ़कर लगभग 3.2% हो जाएगा. राजकोषीय घाटा 4.4% से बढ़कर 5.6% हो सकता है.
सरकार ने बनाई ये योजना सीईए ने समिति को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशियाई संघर्ष के कारण समुद्री यातायात में देरी के 'तिहरे झटके'से निपटने की योजना बना रही है और घरेलू ईंधन की कीमतों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर फोकस है. इस कारण भारत पर गंभीर संकट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर दो से तीन तिमाहियों तक 130 डॉलर प्रति बैरल तक बने रहने पर निर्भर करेगा.
शॉर्ट टर्म में कोई असर नहीं सीईए ने कहा कि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर पर कबतक बनी रहती हैं. उन्होंने कहा कि अगर शॉर्टटर्म तक है तो भले ही यह बढ़कर 130 डॉलर तक पहुंच जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा कि विश्लेषण से पता चलता है कि 90 डॉलर प्रति बैरल तक, वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4%, महंगाई लगभग 2%, चालू खाता घाटा 1-1.2% और राजकोषीय घाटा 43%-4.4% के व्यापक आर्थिक अनुमान स्थिर बने रहेंगे.

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