
अगला सीबीआई चीफ चुनने के लिए मीटिंग आज, पीएम मोदी भी होंगे शामिल
AajTak
सीबीआई प्रमुख के लिए जो नाम रेस में हैं उनमें अंतरिम सीबीआई, बीएसएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रमुख राकेश अस्थाना और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) प्रमुख वाईसी मोदी भी शामिल हैं.
देश की सबसे शक्तिशाली जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख का पद मार्च महीने से ही रिक्त पड़ा है. सीबीआई चीफ पद से ऋषि कुमार शुक्ल के सेवानिवृत्त होने के बाद से ही केंद्रीय एजेंसी को अपने नए प्रमुख की तलाश है. सीबीआई के चीफ का यह इंतजार जल्द समाप्त हो सकता है. सीबीआई का नया प्रमुख चुनने के लिए आज यानी 24 मई को बैठक होनी है. इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी शामिल होंगे. सीबीआई प्रमुख का चयन करने के लिए होने जा रही इस बैठक में उन नामों पर चर्चा होगी जो इस पद की रेस में हैं. बताया जा रहा है कि सीबीआई प्रमुख के लिए जो नाम रेस में हैं उनमें अंतरिम सीबीआई, बीएसएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रमुख राकेश अस्थाना और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) प्रमुख वाईसी मोदी भी शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.







